
नई दिल्ली। सरकार द्वारा छात्र संगठनों की शर्तें मानना और कैबिनेट स्तर पर बदलाव करना लोकतांत्रिक दबाव की प्रभावशीलता को दशार्ता है जिसने 12 वर्षों के राजनीतिक प्रतिमान को बदल दिया है। मुआवजे और एफआईआर वापसी की घोषणा के साथ अब ध्यान चार हफ्ते बाद होने वाली परीक्षा सुधार चचार्ओं पर केंद्रित है जो भविष्य की शिक्षा नीतियों को दिशा देगी।
कॉकरोच जनता पार्टी के छात्र आंदोलन के भारी दबाव के बाद केंद्र सरकार ने शनिवार को छात्रों की सभी मांगें मान ली हैं। इसके साथ ही धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उनके इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। मोदी सरकार के 12 सालों से ज्यादा के कार्यकाल में किसी कैबिनेट मंत्री को इस तरह हटाए जाने की यह पहली बड़ी घटना है, जिसे बीजेपी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका और विपक्ष के लिए बढ़त के रूप में देखा जा रहा है।
उखढ ने वापस लिया आंदोलन, सरकार से बनी सहमति-कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में चल रहा यह आंदोलन सरकार के साथ तीसरे दौर की बातचीत के बाद खत्म कर दिया गया। अभिजीत दिपके की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात की। इसके बाद पार्टी प्रवक्ता सौरव दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तुरंत आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया। सीजेपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, लोकतंत्र की जीत हुई।
छात्रों पर हुई एफआईआर होंगी वापस-सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मुख्य शर्तों को स्वीकार कर लिया है। इसके तहत नीट अभ्यर्थियों में जिन छात्रों ने आत्महत्या की थी, उनके परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा दिल्ली और बीजेपी शासित राज्यों में प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज केस वापस लिए जाएंगे। दोनों पक्षों के बीच चार हफ्ते बाद होने वाली अगली बैठक में परीक्षा सिस्टम में सुधार के रोडमैप पर बात होगी।



