खैरथल
खैरथल में जिंदगी दो मोर्चों पर हारी
6 माह में 47 ने सड़क हादसों में गंवाई जान, 17 ने किया सुसाइड।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
खैरथल : साल 2026 की पहली छमाही (1 जनवरी से 30 जून) जिले के लिए एक बेहद चिंताजनक तस्वीर लेकर आई है। महज छह महीनों में ही 64 लोगों की असमय मौत ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इनमें से 47 लोगों की जान जहां सड़क दुर्घटनाओं में गई, वहीं 17 लोगों ने मानसिक व सामाजिक दबाव के आगे हार मानकर आत्महत्या कर ली। इस अवधि के दौरान जिले के अस्पतालों में कुल 143 शवों का पोस्टमार्टम किया गया, जिनमें से अकेले जिला मुख्यालय स्थित सैटेलाइट अस्पताल में 23 शवों का पोस्टमार्टम हुआ। आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि जिले में जिंदगी दो मोर्चों पर लगातार हार रही है, एक तेज रफ्तार सड़कों पर और दूसरा डिप्रेशन के आगे। सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में सबसे अधिक मौतें खैरथल थाना क्षेत्र में दर्ज हुई हैं। इसके बाद किशनगढ़ बास और मुंडावर थाना क्षेत्र भी हादसों के बड़े हॉट स्पॉट बनकर उभरे हैं। पिछले वर्ष भी इन क्षेत्रों में ही सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं और मौतें दर्ज की गई थीं। हालांकि, राहत की बात यह रही कि खैरथल-हरसौली मार्ग पर अवैध स्पीड ब्रेकर हटाने और खैरथल-किशनगढ़ मार्ग पर जेब्रा मार्किंग किए जाने के बाद इन छह महीनों में कई संभावित हादसे टले हैं। इससे पहले इन्हीं मार्गों पर लगातार जानलेवा दुर्घटनाएं हो रही थीं।
आत्महत्या के मामलों में ग्रामीण क्षेत्र आगे, फंदा लगाने और जहर खाने के मामले ज्यादा
आत्महत्या के मामलों में भी तस्वीर कम भयावह नहीं है। छह महीनों में दो महिलाओं और आठ पुरुषों ने विषाक्त पदार्थ का सेवन कर जान दे दी, जबकि चार महिलाओं और दो पुरुषों ने फंदा लगाकर आत्महत्या की। वहीं, एक व्यक्ति ने ट्रेन के आगे छलांग लगाकर अपना जीवन समाप्त कर लिया। आत्महत्या करने वालों में अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र के निवासी हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि दोनों ही प्रकार की घटनाओं में सबसे अधिक प्रभावित 23 से 42 वर्ष आयु वर्ग के युवा रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2024 में सड़क दुर्घटना के 203 प्रकरण दर्ज हुए थे। वर्ष 2025 में यह संख्या 200 रही, लेकिन मृतकों का आंकड़ा 94 से बढ़कर 99 पहुंच गया। वर्ष 2026 की तो अभी केवल छह महीने की अवधि ही बीती है और सड़क हादसों में 47 लोगों की मौत हो चुकी है।
वर्जन
साल की पहली छमाही के आंकड़े बताते हैं कि सड़क हादसे और आत्महत्या गंभीर चिंता का विषय हैं। खासकर 23 से 42 वर्ष आयु वर्ग में ऐसे मामले अधिक हैं। सड़क सुरक्षा नियमों की पालना के साथ मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों की समय पर काउंसलिंग और पारिवारिक सहयोग जरूरी है।
डॉ. अरविन्द गेट, सीएमएचओ खैरथल तिजारा
सड़क हादसे रोकने के लिए ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर सुधार कार्य, ओवर स्पीड और यातायात नियमों के उल्लंघन पर लगातार विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। वाहन चलाते समय नियमों का पालन करें और जल्दबाजी से बचे। आत्महत्या जैसी घटनाओं की रोकथाम के लिए मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों के प्रति संवेदनशील रहकर समय पर सहयोग और संवाद बढ़ाना चाहिए।
बृजेश ज्योति उपाध्याय, एसपी




