ऑल वेदर रोड : ‘ रखरखाव के नाम पर सिर्फ ‘फोटो सेशन’!

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
उत्तरकाशी : करोड़ों की लागत से बनी ऑल वेदर रोड पर अब सफर कम और ‘सफारी’ का अहसास ज्यादा हो रहा है! देवीधार से चुँगी बडेथी तक की सड़क इन दिनों विभागीय लापरवाही और कार्यदायी संस्थाओ की आक्रमणता का जीता-जागता नमूना बन चुकी है। सड़क किनारे उगी घनी झाड़ियां, बिखरा कबाड़ और पड़े बोल्डर चीख-चीख कर कह रहे हैं कि रखरखाव के नाम पर सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं।
कागजों में चमचमाती सड़क, ज़मीन पर उफनती नालियां
पूर्व में ऑल वेदर परियोजना के तहत सीमा सड़क संगठन (BRO) ने पेंटिंग, सुरक्षा दीवार और नालियों के निर्माण का जिम्मा भारत कंस्ट्रक्शन कंपनी, गणपति कंस्ट्रक्शन कंपनी आदि को दिया था, कुछ ने सह-कंपनी ‘स्टोन फील्ड’ से भी काम करवाया था । अनुबंध के मुताबिक सड़क बनने के बाद उसके रखरखाव (Maintenance) की पूरी जिम्मेदारी भी कार्यदायी कंपनीयों की ही थी।
सड़क बने 5 साल बीत चुके हैं और कंपनी के अनुबंध का अब महज 1 साल बाकी रह गया है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नालियों की सफाई न होने से बारिश का गंदा पानी सड़कों पर बहते हुए सीधे स्थानीय बाजारों और लोगों के घरों में घुस रहा है।
वहीं दोनों तरफ फैली झाड़ियों के कारण तीखे मोड़ों पर सामने से आते वाहन दिखाई नहीं देते, जिससे हर वक्त बड़े हादसों का खतरा बना रहता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कंपनी के कर्मचारी केवल ‘फोटो खिंचवाने’ आते हैं। चंद तस्वीरें खींचकर उच्चाधिकारियों को भेज दी जाती हैं और काम पूरा मान लिया जाता है।
जनता का सवाल— आखिरी साल में भी नहीं जागेगा प्रशासन?
जब अनुबंध में मेंटेनेंस शामिल है, तो फिर जनता इस बदहाली को झेलने पर क्यों मजबूर है? अनुबंध खत्म होने में सिर्फ एक साल बचा है, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कंपनी सिर्फ औपचारिकता पूरी कर निकल जाएगी? स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने BRO और प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेकर नालियों की सफाई व झाड़ियों के कटान की मांग की है, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले व्यवस्था पटरी पर आ सके।



