एलीट पब्लिक स्कूल में शिक्षक दिवस पर दिखी गुरु-शिष्य संबंधों की आत्मीयता, रंगारंग प्रस्तुतियों ने बांधा समां
The intimacy of the teacher-student relationship was on display at Elite Public School on Teachers' Day; colourful presentations enthralled the audience.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़। शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना जब विद्यार्थियों की रचनात्मकता से जुड़ी, तो एलीट पब्लिक स्कूल, पाकुड़ में आयोजित शिक्षक दिवस समारोह भावनाओं, उत्साह और उल्लास से भर उठा। समारोह की खास बात यह रही कि पूरे कार्यक्रम की कमान विद्यार्थियों ने स्वयं संभाली। मंच संचालन से लेकर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और शिक्षकों के अभिनंदन तक विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और जिम्मेदारी का परिचय दिया। सीबीएसई, नई दिल्ली से संबद्ध एलीट पब्लिक स्कूल, पाकुड़ (संबद्धता संख्या 3430601) में आयोजित समारोह में भारत के महान शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती को शिक्षक दिवस के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भव्य स्वागत के साथ हुई। विद्यालय परिसर में उत्सव का माहौल था और विद्यार्थियों में अपने शिक्षकों के लिए कुछ विशेष करने का उत्साह स्पष्ट दिखाई दे रहा था। समारोह के प्रारंभ में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। विद्यार्थियों ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि जीवन की राह दिखाने वाले मार्गदर्शक और संस्कारों के निर्माता भी होते हैं। इसके बाद दीप प्रज्वलन और केक काटने का आयोजन हुआ। इस अवसर पर शिक्षकों को उनके व्यक्तित्व, कार्यशैली और विद्यार्थियों के प्रति योगदान के अनुरूप विशेष सम्मानजनक उपाधियों से संबोधित किया गया। शिक्षकों की विशिष्ट खूबियों को रेखांकित करने वाली इन उपाधियों पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। समारोह में विद्यालय के निदेशक अरविंद साह, सह-निदेशक अनुपम आनंद और प्रधानाचार्य अभिजीत रॉय की उपस्थिति एवं मार्गदर्शन ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की। विद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मियों ने विद्यार्थियों के प्रयास की सराहना की। विद्यार्थियों ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन, उनके शिक्षा-दर्शन और शिक्षक दिवस के महत्व पर विचार व्यक्त किए। वक्तव्यों में गुरु के महत्व, शिक्षा के उद्देश्य और विद्यार्थियों के जीवन में शिक्षक की भूमिका को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। इसके बाद रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का दौर शुरू हुआ। विद्यार्थियों ने गीत, नृत्य, कविता, भाषण, हास्य-नाटिका सहित विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। हर प्रस्तुति के बाद सभागार तालियों से गूंज उठता रहा। विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों की भागीदारी ने कार्यक्रम को जीवंत और विविधतापूर्ण बना दिया। समारोह का विशेष आकर्षण शिक्षकों की मिमिक्री रही। विद्यार्थियों ने शिक्षकों की विशिष्ट कार्यशैली, बोलने के अंदाज और कक्षा में उनके व्यवहार को हास्यपूर्ण लेकिन सम्मानजनक ढंग से प्रस्तुत किया। इस दौरान शिक्षक और विद्यार्थी दोनों जमकर हंसे। मिमिक्री ने गुरु-शिष्य संबंधों में मौजूद सहजता और आत्मीयता को भी उजागर किया। शिक्षक-विद्यार्थी संवाद और मनोरंजक खेलों ने समारोह को और अधिक आत्मीय बना दिया। कक्षा की औपचारिकता से अलग शिक्षक और विद्यार्थी एक-दूसरे के साथ सहज रूप से जुड़े दिखाई दिए। हंसी-खुशी के इन क्षणों ने आपसी विश्वास और अपनत्व को और मजबूत किया। इसके बाद विद्यार्थियों की ओर से शिक्षकों का विधिवत अभिनंदन एवं सम्मान किया गया। सम्मान के दौरान विद्यार्थियों की कृतज्ञता और शिक्षकों के प्रति स्नेह स्पष्ट दिखाई दिया। कई भावुक क्षणों में शिक्षक और विद्यार्थी दोनों की आंखें नम नजर आईं। समारोह का भावनात्मक चरम उस समय आया, जब विद्यार्थी स्वप्नदीप रॉय ने विशेष अंतिम विद्यार्थी श्रद्धांजलि प्रस्तुत की। उनकी प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भावुक कर दिया और शिक्षकों के प्रति विद्यार्थियों की गहरी सम्मान भावना को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया। यह समारोह के सबसे यादगार क्षणों में शामिल रहा। समापन अवसर पर निदेशक अरविंद साह ने शिक्षकों की भूमिका को समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को विषयगत ज्ञान देने के साथ-साथ अनुशासन, संस्कार, नैतिक मूल्यों और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का सबसे सुंदर तरीका उनके बताए मार्ग पर चलना है। सह-निदेशक अनुपम आनंद ने गुरु-शिष्य संबंध की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थी की सफलता के पीछे शिक्षकों का निरंतर मार्गदर्शन, धैर्य और परिश्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा को केवल परीक्षा तक सीमित न रखने तथा शिक्षकों के अनुभवों का सम्मान करने का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा पूरे कार्यक्रम का संचालन किए जाने को उनके आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का परिचायक बताया। प्रधानाचार्य अभिजीत रॉय ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन में दीपक की तरह होते हैं, जो स्वयं प्रकाश देकर दूसरों के जीवन को दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल बेहतर अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी तैयार करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार, संवेदनशील और संस्कारवान नागरिक बनाना भी है। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए विद्यार्थियों और शिक्षकों को बधाई दी। एलीट पब्लिक स्कूल का यह शिक्षक दिवस समारोह केवल एक वार्षिक आयोजन बनकर नहीं रहा, बल्कि इसने गुरु और शिष्य के बीच सम्मान, विश्वास, संस्कार और आत्मीयता के रिश्ते को जीवंत रूप में सामने रखा। विद्यार्थियों द्वारा स्वयं कार्यक्रम का संचालन इस बात का प्रमाण रहा कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि नेतृत्व, जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति का भी विकास करती है। समारोह ने यह संदेश दिया कि शिक्षक वर्तमान को शिक्षित करने के साथ भविष्य का निर्माण भी करता है। उनके ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन की रोशनी में विद्यार्थी अपने जीवन की राह तलाशते हैं और आगे चलकर समाज तथा राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।



