गोड्डा

गोड्डा में दो दिवसीय कार्यशाला सम्पूर्णा 2.0 कार्यक्रम का हुआ समापन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
गोड्डा। इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन वीमेन (आई सी आर डब्लू ) के नेतृत्व में सम्पूर्णा 2.0 के साझेदार संस्थाओं  उगम फ़ाउंडेशन, जन लोक कल्याण परिषद, पिरामल फ़ाउंडेशन, लोक कल्याण सेवा केंद्र का दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम 7–8 सितंबर को गोड्डा में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य सम्पूर्ण 2.0 की दिशा, रणनीतियों और साझेदार संस्थाओं की भूमिकाओं को साझा समझ के साथ आगे बढ़ाना तथा बच्चों के सामाजिक-भावनात्मक विकास और लैंगिक समानता को विद्यालयी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना था। सामाजिक एवं भावनात्मक सीख और जेंडर GESI – जेंडर समानता एवं सामाजिक समावेशन  के माध्यम से बच्चों के लिए समावेशी एवं सुरक्षित विद्यालयी वातावरण बनाने पर जोर दिया गया।
दो दिवसीय ओरिएंटेशन के दौरान था। सामाजिक एवं भावनात्मक सीख और जेंडर  GESI – जेंडर  समानता एवं सामाजिक समावेशन के बीच संबंधों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने भावनाओं, रिश्तों, संवाद और लैंगिक मान्यताओं को समझने के लिए विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। इस दौरान यह समझ विकसित करने पर जोर दिया गया कि बच्चों के भावनात्मक अनुभव और उनके सीखने के अवसर उनके सामाजिक एवं लैंगिक परिवेश से प्रभावित होते हैं। कार्यक्रम में आत्म – जागरूकता, आत्म-प्रबंधन, सामाजिक जागरूकता, संबंध कौशल और जिम्मेदार निर्णय लेने पर गतिविधि आधारित चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने विभिन्न परिस्थितियों के माध्यम से समझा कि ये कौशल एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और बच्चों के साथ-साथ वयस्कों के व्यक्तिगत एवं पेशेवर जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ओरिएंटेशन के दौरान बच्चों की अलग-अलग सामाजिक परिस्थितियों को समझने के लिए समूह गतिविधि भी आयोजित की गई। प्रतिभागियों ने चर्चा की कि लैंगिकता, भाषा, समुदाय, आर्थिक स्थिति और सामाजिक पृष्ठभूमि बच्चों के स्कूल अनुभव, आत्मविश्वास और सीखने के अवसरों को किस प्रकार प्रभावित कर सकती है। इस चर्चा में बच्चों के लिए सम्मान, अपनी बात रखने का अवसर, सकारात्मक संबंध, सुरक्षित वातावरण, समान अवसर तथा सुने और समझे जाने की आवश्यकता को रेखांकित किया गया। कार्यक्रम में इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया कि केवल SEL सिखाना ही पर्याप्त नहीं है। बच्चों की सामाजिक, भावनात्मक और लैंगिक वास्तविकताओं को समझना तथा विद्यालयों में मौजूद भेदभावपूर्ण व्यवहार और मान्यताओं को चुनौती देना भी आवश्यक है। एक लैंगिक रूप से संवेदनशील और समावेशी शिक्षक  सभी बच्चों को समान रूप से अपनी बात रखने का अवसर दे सकता है, बच्चों की भाषा एवं पृष्ठभूमि का सम्मान कर सकता है और उनके लिए सुरक्षित एवं सहयोगी वातावरण तैयार कर सकता है। सम्पूर्णा 2.0 के तहत विद्यालयों, शिक्षकों, अभिभावकों और समुदाय की भागीदारी को मजबूत करने की रणनीतियों पर भी चर्चा हुई। इनमें शिक्षक प्रशिक्षण के दृष्टिकोण में बदलाव, सरकारी तंत्र को प्रभावित करना, SEL चैंपियंस को रोल मॉडल के रूप में बढ़ावा देना, बाल संसद को मजबूत करना, PTM के माध्यम से अभिभावकों की भागीदारी और पेरेंट्स सपोर्ट ग्रुप का उपयोग शामिल है।
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