पाकुड़

ईशाकपुर रेल गेट पर रेल- ओवर- ब्रिज निर्माण की राह साफ, ढाई लाख आबादी को मिलेगा सीधा लाभ

Path cleared for the construction of a rail-over-bridge at the Ishakpur railway crossing; a population of 2.5 lakh will directly benefit.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़। जिले के चर्चित ईशाकपुर (पाकुड़) रेल गेट पर लंबे समय से प्रस्तावित रेल ओवर ब्रिज/ रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) के निर्माण की दिशा में अब महत्वपूर्ण प्रगति होने की उम्मीद है। सितंबर महीने के अंत तक टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात धरातल पर निर्माण कार्य शुरू होने की सम्भावना जताई जा रही है। आरओबी का निर्माण होने से पाकुड़ रेलखंड पर आवागमन की बड़ी समस्या का समाधान होगा और क्षेत्र की करीब ढाई लाख आबादी को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। ईसाकपुर रेल गेट पर रेलवे क्रॉसिंग के कारण आये दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। ट्रेनों के आवागमन के दौरान गेट बंद होने से सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। इससे आम लोगों के साथ-साथ स्कूली बच्चों, मरीजों, कर्मचारियों और छोटे-बड़े कारोबारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। आरओबी बनने के बाद इस समस्या से काफी हद तक निजात मिलने की उम्मीद है। पाकुड़ रेलखंड के ईशाकपुर रेल गेट पर आरओबी का निर्माण केवल पाकुड़ जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका लाभ पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले की बड़ी आबादी को भी मिलने की संभावना है। साथ ही इस मार्ग से होकर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद स्थित एनएच- 34 तक प्रस्तावित नेशनल हाईवे की निर्माण होने की भी सम्भावनाएं हैं। वही बेहतर सड़क सम्पर्क से दोनों क्षेत्रों के बीच आवागमन आसान होगा और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि आरओबी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण लाइफलाइन ब्रिज साबित हो सकता है। इसके निर्माण से लोगों को रेलवे फाटक पर लगने वाले जाम में घंटों फंसने से राहत मिलेगी और वे अपने गंतव्य तक कम समय में पहुंच सकेंगे। आरओबी बनने से यातायात व्यवस्था सुगम होने के साथ ही आसपास के छोटे-बड़े व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आवागमन आसान होने से बाजारों तक लोगों की पहुंच बढ़ेगी और कारोबारियों को इसका लाभ मिल सकता है। स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने से रोजगार के अवसर भी बढ़ने की सम्भावना है। रेलवे फाटक बंद होने के कारण सबसे अधिक परेशानी आपात स्थिति में मरीजों और स्कूली बच्चों को होती है। कई बार एंबुलेंस और अन्य जरूरी वाहनों को ट्रेन गुजरने तक इंतजार करना पड़ता है। आरओबी के निर्माण से ऐसे वाहनों को वैकल्पिक निर्बाध मार्ग मिलेगा, जिससे आपातकालीन सेवाओं को भी राहत मिलेगी। वहीं, स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को भी रोजाना लगने वाले जाम से छुटकारा मिल सकेगा। स्थानीय लोगों का मानना है कि ईशाकपुर रेल गेट पर आरओबी का निर्माण क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद यदि निर्माण कार्य निर्धारित समय पर शुरू होता है, तो आने वाले समय में यह परियोजना पाकुड़ जिले के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों की यातायात और आर्थिक व्यवस्था को नई गति दे सकती है। ईस्टर्न जोनल रेलवे पैसेंजर्स एसोसिएशन, हावड़ा मंडल के अध्यक्ष हिसाबी राय एवं सचिव राणा शुक्ला ने कहा कि जनहित में ईजरप्पा की लंबे समय से चली आ रही मांग को महाप्रबंधक, पूर्व रेलवे, कोलकाता ने पूरा किया है। उन्होंने इसके लिए महाप्रबंधक के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस निर्णय से रेल यात्रियों को काफी सुविधा मिलेगी। राणा शुक्ला ने कहा कि पाकुड़ वासियों को इशाकपुर आरओबी निर्माण होने वाले कार्य की खुशी की खबर जल्द ही मिल सकती है और बरसों की मांगे शत- प्रतिशत पूरी होने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि ईस्टर्न रेलवे के हावड़ा डिवीजन के अन्तर्गत आने वाले पाकुड़ रेलखंड से रेलवे को प्रतिवर्ष लगभग 5000 हजार करोड़ रुपए (से अधिक) का राजस्व प्राप्त होता है। इसके बावजूद यहां के रेल यात्रियों को अब तक अपेक्षित यात्री सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। इतना ही नहीं, पाकुड़ से दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन की मांग भी आज तक पूरी नहीं हो सकी है। समय-समय पर रेलवे से जुड़ी राहत की खबरें अखबारों के पन्नों की सुर्खियां जरूर बनती हैं, लेकिन धरातल पर यात्रियों की कई प्रमुख उम्मीदें अब भी अधूरी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की बढ़ती आबादी और यात्रियों की संख्या को देखते हुए रेलवे को यहां बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ लंबी दूरी की नई ट्रेनों की भी आवश्यकता है। हालांकि, ईशाकपुर रेल गेट पर रोड ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण क्षेत्रवासियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है। इसके निर्माण से रेल गेट पर लगने वाले जाम से निजात मिलने के साथ-साथ आवागमन सुगम होगा। साथ ही, यह परियोजना क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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