पाकुड़

पाकुड़ व्यवहार न्यायालय में राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन, 18864 मामलों का हुआ निष्पादन, 5.85 करोड़ रुपये से अधिक का समझौता

National Lok Adalat successfully organized at Pakur Civil Court; 18,864 cases disposed of, settlements worth over ₹5.85 crore reached.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़ व्यवहार न्यायालय परिसर में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) के तत्वावधान में राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत का वर्चुअल उद्घाटन झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद, सह कार्यकारी अध्यक्ष, झालसा, रांची द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडेय की अध्यक्षता में पाकुड़ व्यवहार न्यायालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में सभी न्यायिक पदाधिकारी वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए। राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन आपसी सहमति एवं सुलह-समझौते के आधार पर सुलहनीय मामलों के त्वरित निस्तारण के उद्देश्य से किया गया। इसका उद्देश्य आम लोगों को कम समय एवं कम खर्च में सुलभ न्याय उपलब्ध कराना तथा विभिन्न अदालतों में लंबित मामलों के बोझ को कम करना रहा। राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए कुल आठ बेंचों का गठन किया गया था। इन बेंचों के माध्यम से कुल 18,864 मामलों का निष्पादन किया गया। वहीं, विभिन्न मामलों में आपसी सुलह-समझौते के आधार पर कुल 5 करोड़ 85 लाख 56 हजार 476 रुपये का समझौता कराया गया। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में वादी-प्रतिवादी एवं संबंधित पक्ष मौजूद रहे। लोक अदालत के माध्यम से मामलों के निस्तारण से लोगों को लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिलने के साथ समय और धन की बचत हुई। मौके पर प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक, अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम कुमार क्रांति प्रसाद, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संजीत कुमार चंद्र, डालसा सचिव रूपा बंदना किरो, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विशाल मांझी, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी सदिश उज्जवल बेक, प्रभारी न्यायाधीश विजय कुमार दास सहित अन्य न्यायिक पदाधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा पैनल अधिवक्ता, लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के अधिवक्ता, मध्यस्थ अधिवक्ता, स्थायी लोक अदालत के सदस्य, विभिन्न बैंकों के अधिकारी, न्यायालय कर्मी, संबंधित विभागों के अधिकारी, पैरा लीगल वॉलंटियर्स तथा वादी-प्रतिवादी भी उपस्थित रहे। राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन से बड़ी संख्या में मामलों का त्वरित एवं आपसी सहमति से निस्तारण हुआ, जिससे न्याय तक आम लोगों की पहुंच को और सुगम बनाने में मदद मिली।

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