गाजियाबाद
लोनी बॉर्डर पर बेखौफ अवैध शराब कारोबार धड़ल्ले से जारी
ढाबों की आड़ में शराबखोरी और फुटपाथ पर अवैध कारोबार को लेकर उठ रहे सवाल
शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर नागरिकों में नाराजगी
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : राजधानी दिल्ली से सटे लोनी बॉर्डर क्षेत्र में कथित रूप से संचालित हो रहे अवैध शराब कारोबारों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। क्षेत्र में ढाबों की आड़ में शराब परोसे जाने और फुटपाथों पर अवैध दुकानों के संचालन के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि शिकायतों और समय-समय पर होने वाली कार्रवाई के बावजूद स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है जिसका कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा।
व्यंग्यात्मक अंदाज में कहें तो लोनी बॉर्डर में कानून व्यवस्था की मौजूदगी जरूर दिखाई देती है, लेकिन अवैध कारोबार के सामने उसकी रफ्तार कुछ धीमी नजर आती है। कभी कार्रवाई की खबर आती है, कुछ दिनों तक गतिविधियां थमती हैं और इसके बाद फिर कथित तौर पर वही कारोबार नए अंदाज में फिर दिखाई देने लगता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कार्रवाई का असर स्थायी क्यों नहीं हो पा रहा है?
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि बॉर्डर क्षेत्र में वाहन आवागमन से लेकर ढाबों और सड़क किनारे संचालित होने वाले कारोबार तक एक ऐसा अनौपचारिक तंत्र विकसित हो गया है, जिसमें कथित धंधेबाज बेखौफ नजर आते हैं। लेकिन नागरिकों की शिकायतों ने पुलिस और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े किए हैं।
शिकायतों पर कार्रवाई या सिर्फ आश्वासन?
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि अवैध शराब बिक्री और अन्य गतिविधियों की शिकायतें संबंधित अधिकारियों तक पहुंचती रही हैं। इसके बावजूद व्यापक और प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देने से लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। नागरिकों का कहना है कि यदि अवैध गतिविधियां वास्तव में चल रही हैं तो नियमित जांच, छापेमारी और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्थानीय स्तर पर पुलिस और आबकारी विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। नागरिकों का कहना है कि जिम्मेदार विभाग यदि नियमित रूप से ढाबों और संदिग्ध स्थानों की जांच करें तो अवैध शराब बिक्री पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।
जनता परेशान, जिम्मेदार विभागों से कार्रवाई की उम्मीद
क्षेत्र के लोगों में इस मुद्दे को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। कुछ नागरिक धरना-प्रदर्शन की चेतावनी भी दे रहे हैं। उनका कहना है कि केवल छिटपुट कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि अवैध गतिविधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाए और कार्रवाई के बाद भी संबंधित स्थानों की निगरानी सुनिश्चित की जाए।
अब देखने वाली बात यह होगी कि लोनी बॉर्डर क्षेत्र में कथित अवैध कारोबार के खिलाफ प्रशासन कब कोई प्रभावी और स्थायी अभियान चलाता है। फिलहाल जनता कार्रवाई की राह देख रही है और जिम्मेदार विभागों से यही सवाल कर रही है कि आखिर कानून का शिकंजा कब तक सिर्फ कागजों पर कसा जाएगा?

