बालाघाट

किरनापुर थाना उपद्रव में पुलिस का दावा—तोड़फोड़ और पत्थरबाजी सुनियोजित

शराब खरीदी के ऑनलाइन भुगतान और वाट्सऐप चैट के साक्ष्य मिलने की बात

 66 लोगों पर एफआईआर, 26 आरोपी गिरफ्तार
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) : किरनापुर थाना परिसर में 15 सितंबर को हुई तोड़फोड़ और पत्थरबाजी के मामले में पुलिस ने जांच के आधार पर घटना को सुनियोजित बताया है। पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा के अनुसार, जांच के दौरान पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर उपद्रव की परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
एसपी आदित्य मिश्रा के मुताबिक, 14 और 15 सितंबर को किरनापुर एवं आसपास की शराब दुकानों से बड़ी संख्या में शराब की पेटियां खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस का दावा है कि इन खरीदी के संबंध में ऑनलाइन भुगतान के रिकॉर्ड के साथ वाट्सऐप चैट भी मिले हैं। इसके अलावा एक ढाबे से भी शराब की पेटियां खरीदे जाने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, ढाबा संचालक ने भी इस संबंध में जानकारी की पुष्टि की है।
आयोजकों को भी नहीं थी उपद्रव की आशंका
एसपी ने कहा कि आयोजित रैली और धरना-प्रदर्शन के आयोजकों को भी संभवतः इस बात की अपेक्षा नहीं थी कि कुछ लोग थाना परिसर में प्रवेश कर उपद्रव और बलवा करेंगे। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
66 लोगों पर एफआईआर, 26 गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, किरनापुर थाना परिसर में हुए उपद्रव के मामले में अब तक 66 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जबकि 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। शेष आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच जारी है।
आयोजकों से सहयोग की अपील
एसपी आदित्य मिश्रा ने मरार माली समाज के आयोजकों से अपील की है कि वे बिना किसी भय के पुलिस के समक्ष आएं और घटना में शामिल उपद्रवी तत्वों की पहचान एवं जांच में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि पुलिस पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच कर रही है।
पूर्व सांसद के खिलाफ एफआईआर पर एसपी की प्रतिक्रिया
            पूर्व सांसद कंकर मुंजारे के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर पूछे गए सवाल पर एसपी ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना अपने आप में अपराध सिद्ध होना नहीं है। उन्होंने कहा कि कंकर मुंजारे एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि हैं और उन्हें सार्वजनिक बयान देते समय मामले को और उलझाने से बचना चाहिए। पुलिस का कहना है कि मामले में जांच के बाद ही आरोपों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की स्थिति स्पष्ट होगी।
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