सिंगरौली
विजय सोनी पर क्यों मेहरबानी?
संदेशवाहक पद पर रहते तेंदूपत्ता शाखा में कथित बाबूगीरी, शासकीय आवास पर भी सवाल

वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, आखिर किस आदेश के तहत मिली जिम्मेदारी? दस्तावेज सामने आने पर साफ होगी तस्वीर
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। वन विभाग सिंगरौली में पदस्थ संदेशवाहक विजय सोनी को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि संदेशवाहक पद पर पदस्थ होने के बावजूद उन्हें तेंदूपत्ता शाखा में लिपिकीय यानी बाबूगीरी से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी दी जा रही है। इसके साथ ही कथित तौर पर शासकीय आवास में निवास किए जाने को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि तेंदूपत्ता शाखा विभाग की महत्वपूर्ण शाखाओं में शामिल है। यहां अभिलेखों, समितियों और विभिन्न प्रशासनिक कार्यों से जुड़े दायित्व होते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि विजय सोनी को यदि वास्तव में लिपिकीय कार्य सौंपे गए हैं तो यह व्यवस्था किस आदेश और किस नियम के तहत की गई है?
पद संदेशवाहक का, काम बाबू का?
सबसे बड़ा सवाल कर्मचारी के पद और उसे सौंपे गए कथित कार्य को लेकर है। क्या विजय सोनी को तेंदूपत्ता शाखा में कार्य करने के लिए सक्षम अधिकारी द्वारा लिखित आदेश जारी किया गया है? यदि आदेश है तो उसकी प्रति सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही? क्या विभाग में नियमित लिपिकीय कर्मचारी उपलब्ध हैं और यदि हैं तो संदेशवाहक को यह जिम्मेदारी देने की प्रशासनिक जरूरत क्या थी?
सवाल कई हैं, लेकिन जवाब सिर्फ विभागीय रिकॉर्ड से मिल सकता है।
शासकीय आवास पर भी सवाल
विजय सोनी के कथित शासकीय आवास में निवास को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आवास किसके नाम आवंटित है? किस आदेश के तहत आवंटित किया गया? क्या विजय सोनी उस आवास में रहने के लिए नियमों के अनुसार पात्र हैं? यदि आवास किसी अन्य कर्मचारी के नाम है तो वहां निवास की अनुमति किस अधिकारी ने दी?
इन सवालों की निष्पक्ष जांच और आवास आवंटन रिकॉर्ड की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
लगातार सवाल, फिर भी विभाग की चुप्पी क्यों?
स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर सवाल उठने के बावजूद विभाग की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आने से चर्चाओं को बल मिल रहा है। हालांकि केवल कार्रवाई नहीं होने से किसी अधिकारी की मिलीभगत या किसी कर्मचारी को संरक्षण मिलने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, लेकिन लगातार उठ रहे सवालों के बीच विभागीय पारदर्शिता जरूरी है।
यदि विजय सोनी को सौंपे गए कार्य और शासकीय आवास से संबंधित सभी व्यवस्थाएं नियमों के अनुरूप हैं, तो विभाग संबंधित आदेश और रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट कर सकता है। वहीं यदि जांच में नियमों के विपरीत कोई व्यवस्था सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अधिवक्ता त्रिपुरारी नाथ पाण्डेय ने भी उठाए सवाल
मामले को लेकर अधिवक्ता त्रिपुरारी नाथ पाण्डेय, बैढ़न, सिंगरौली द्वारा भी सवाल उठाए जाने की बात सामने आई है। अब निगाहें वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और डीएफओ कार्यालय के आधिकारिक पक्ष पर टिकी हैं।
क्या विजय सोनी को तेंदूपत्ता शाखा में लिपिकीय कार्य सौंपने का कोई विधिवत आदेश है? शासकीय आवास किसके नाम है? और क्या दोनों व्यवस्थाएं विभागीय नियमों के अनुरूप हैं?
इन सवालों का जवाब विभागीय दस्तावेजों से ही सामने आ सकता है।



