असम
असम परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप, मालवाहक वाहनों के GVW पंजीकरण पर उठे सवाल।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम के परिवहन विभाग में कथित भ्रष्टाचार और मालवाहक वाहनों के पंजीकरण में Gross Vehicle Weight (GVW) से छेड़छाड़ के आरोप लगाए गए हैं। कुटुम्ब सुरक्षा परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष सत्यरंजन बोरा ने हाल ही में गुवाहाटी प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में ये आरोप लगाए। बोरा ने कहा कि वाहन निर्माता कंपनी वाहन तैयार करते समय उसके कुल अनुमत भार—अर्थात वाहन और माल सहित Gross Vehicle Weight—का निर्धारण करती है। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अनुसार परिवहन वाहन के पंजीकरण प्रमाणपत्र में GVW और धुरियों का अनुमत भार दर्ज किया जाता है तथा निर्धारित सीमा से अलग भार दर्ज करने पर कानूनी सवाल उठते हैं। परिषद का आरोप है कि असम के कुछ जिला परिवहन कार्यालयों में मालवाहक वाहनों के पंजीकरण प्रमाणपत्रों में वास्तविक GVW से 2 से 3 टन तक अधिक भार दर्ज किया जा रहा है। संगठन का दावा है कि इससे वाहन की क्षमता से अधिक माल ढोने को बढ़ावा मिल सकता है और सड़क सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। बोरा ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार की ओर से 2018 में कुछ श्रेणी के वाहनों के वास्तविक GVW में 10 प्रतिशत तक वृद्धि की अनुमति संबंधी प्रावधानों का उल्लेख किया गया था, लेकिन किन वाहनों पर यह प्रावधान लागू होता है, इस संबंध में विभाग ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। इस मुद्दे पर परिवहन आयुक्त और परिवहन मंत्री को सितंबर के प्रारंभ में पत्र भेजे जाने के बावजूद कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलने का आरोप लगाया गया। परिषद के अनुसार, विभाग ने जिला परिवहन अधिकारियों के लिए राजस्व संग्रह का लक्ष्य निर्धारित किया है। संगठन ने सवाल उठाया कि जब पंजीकरण प्रमाणपत्र में अधिक GVW दर्ज किया गया है, तो उसी वाहन पर मूल GVW के आधार पर ओवरलोडिंग का जुर्माना किस आधार पर लगाया जा रहा है।संवाददाता सम्मेलन में कुछ बिचौलियों और अधिकारियों के नाम लेकर अवैध वसूली में संलिप्तता के आरोप भी लगाए गए। परिषद ने दावा किया कि श्रीरामपुर से लेकर राज्य के विभिन्न हिस्सों में मालवाहक वाहनों से कथित रूप से धन वसूला जा रहा है। इन आरोपों में कामरूप महानगर जिला परिवहन कार्यालय के कुछ अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों का भी उल्लेख किया गया। संगठन ने मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री से आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने, GVW पंजीकरण को स्पष्ट करने तथा जांच पूरी होने तक ओवरलोडिंग के नाम पर मनमाने जुर्माने की वसूली रोकने की मांग की है।



