गाजियाबाद
पांच दिन के अल्टीमेटम पर लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर का पलटवार
बोले- बयान पर पूरी तरह कायम
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : कैराना से सपा सांसद इकरा हसन को लेकर लोनी विधायक द्वारा दिए गए बयान के बाद शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब और तेज हो गया है। सपा नेताओं की ओर से दिए गए 5 दिन के अल्टीमेटम के बीच लोनी से भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने मंगलवार सुबह फिर पलटवार करते हुए साफ कर दिया कि वह अपने बयान पर पूरी तरह कायम हैं। विधायक ने कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा, जिसे गलत माना जाए।
विधायक ने सपा नेता की चेतावनी पर तंज कसते हुए कहा, “अपने नौकर से धमकी दिलवाना इस बात को साबित करता है कि वह समाज का केवल इस्तेमाल करना चाहती हैं।”
‘धर्म परिवर्तन के लिए नहीं कहा’
नंदकिशोर गुर्जर ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने सांसद इकरा हसन से धर्म परिवर्तन के लिए नहीं कहा था। उनके मुताबिक, यह गुर्जर समाज का आंतरिक मामला है। विधायक ने कहा कि सहारनपुर में गुर्जर समाज की बैठक के दौरान उनका उद्देश्य समाज को एकजुट करने और आपसी भाईचारे का संदेश देना था, लेकिन उनके बयान को अलग संदर्भ में पेश कर राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि गुर्जर समाज पूरी तरह एकजुट है और समाज को बांटने की राजनीतिक कोशिशों को सफल नहीं होने दिया जाएगा।
क्या था नंदकिशोर गुर्जर का मूल बयान?
दरअसल, सहारनपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में नंदकिशोर गुर्जर ने कैराना की सपा सांसद इकरा हसन के गुर्जर समाज से जुड़ाव के दावे का जिक्र करते हुए कहा था कि यदि वह खुद को गुर्जर समाज का हिस्सा मानती हैं तो किसी हिंदू गुर्जर युवक से शादी करें। विधायक ने कहा था कि ऐसा होने पर समाज उन्हें परिवार की बेटी के रूप में स्वीकार करेगा और विवाह में सहयोग भी करेगा। उनके इस बयान की रिपोर्ट कई मीडिया संस्थानों ने प्रकाशित की थी।
विधायक ने अपने संबोधन में गुर्जर समाज में डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस और पीसीएस अधिकारियों समेत शिक्षित युवाओं की मौजूदगी का भी उल्लेख किया था।
बयान के बाद बढ़ी सियासी गर्मी
नंदकिशोर गुर्जर के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इसे लेकर प्रतिक्रिया सामने आई। अब सपा नेताओं के 5 दिन के अल्टीमेटम के जवाब में विधायक ने अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया है। उनका कहना है कि उनके बयान को गलत अर्थ देकर विवाद खड़ा किया जा रहा है।
विधायक के पलटवार के बाद यह मामला पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। फिलहाल दोनों पक्षों के बयानों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है।
