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पाकुड़ सदर अस्पताल में अव्यवस्थाओं पर उठे सवाल, सीजेरियन प्रसूताओं की परेशानी पर कांग्रेस ने जताई नाराजगी

Concerns raised over mismanagement at Pakur Sadar Hospital; Congress expresses displeasure over the hardships faced by women undergoing Caesarean deliveries.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़ सदर अस्पताल में प्रसव के बाद माताओं और नवजात शिशुओं को रखे जाने वाले वार्ड में अव्यवस्थाओं का मामला सामने आया है। वार्ड में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं होने, पंखे खराब रहने और चिकित्सा सुविधाओं की कमी को लेकर मरीजों के परिजनों ने शिकायत की। वही सीजेरियन प्रसव के बाद पांच दिनों तक ड्रेसिंग नहीं किए जाने का आरोप भी सामने आया है। मामले को लेकर अस्पताल पहुंचे कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने नाराजगी जताते हुए सिविल सर्जन (सीएस) से व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार की मांग की। जानकारी के अनुसार, प्रसव के बाद माताओं को उनके नवजात शिशुओं के साथ जिस वार्ड में रखा जाता है, वहां रोशनी की समुचित व्यवस्था नहीं थी और पंखों की स्थिति भी खराब बताई गई। अस्पताल में भर्ती माताओं ने अपने नवजात बच्चों को गोद में लेकर बेड पर बैठे हुए सिविल सर्जन के समक्ष अपनी परेशानियां रखीं। परिजनों ने चिकित्सा व्यवस्था में सुधार करने तथा मरीजों को नियमानुसार आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। इस दौरान कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने वार्ड की स्थिति का जायजा लिया। प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष श्री कुमार सरकार, विधायक प्रतिनिधि गुलाम अहमद, प्रखंड अध्यक्ष मानसरोवर, जिला उपाध्यक्ष असद हुसैन तथा विधायक के चिकित्सा विभाग के प्रतिनिधि मुख्तार हुसैन सहित अन्य लोग शामिल थे।
खुले बिजली बोर्ड को लेकर जताई चिंता
निरीक्षण के दौरान वार्ड में बिजली की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए इलेक्ट्रीशियन द्वारा मरम्मत का काम किए जाने पर कांग्रेस प्रतिनिधियों ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मरीजों के भर्ती रहने के दौरान बिजली की ऐसी अव्यवस्थाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। खुले और खराब हालत में पड़े बिजली बोर्ड से मरीजों, खासकर माताओं और नवजात शिशुओं के लिए दुर्घटना का खतरा बना रह सकता है। प्रतिनिधिमंडल ने बिजली व्यवस्था को सुरक्षित बनाने और सभी खराब उपकरणों की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल की शिकायतों पर सिविल सर्जन डॉ प्रवीण कुमार संथालिया ने वार्ड की लाइटिंग व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए संबंधित तकनीकी कर्मचारियों को निर्देश देने की बात कही। साथ ही, सीजेरियन प्रसव के बाद पांच दिनों तक ड्रेसिंग नहीं किए जाने के आरोप को गंभीरता से लेते हुए ड्यूटी पर तैनात संबंधित कर्मियों से जवाब-तलब करने की बात कही। उन्होंने चिकित्सा विभाग के नियमानुसार मरीजों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और वार्ड की व्यवस्था में सुधार करने का आश्वासन दिया। कांग्रेस जिला अध्यक्ष श्रीकुमार सरकार ने कहा कि सीजेरियन प्रसव के बाद माताओं को नवजात बच्चों के साथ जिस वार्ड में रखा गया था, वहां रोशनी की समुचित व्यवस्था नहीं थी और पंखे भी ठीक से काम नहीं कर रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल अस्पताल पहुंचा, तभी बिजली व्यवस्था की मरम्मत क्यों शुरू की गई। उन्होंने कहा कि अस्पताल में मरीजों को बुनियादी सुविधाएं समय पर मिलनी चाहिए। वही कांग्रेस के प्रखंड अध्यक्ष मानसारुल हक ने कहा कि अस्पताल की व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया और मरीजों को नियमानुसार सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो कांग्रेस आने वाले दिनों में धरना देकर इसका जोरदार विरोध करेगी। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि सदर अस्पताल में प्रसव के बाद भर्ती माताओं और नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। साथ ही, सीजेरियन प्रसव के बाद मरीजों की ड्रेसिंग, बिजली, पंखे और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि मरीजों को इलाज के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। इस मौके पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता असद हुसैन, विधायक प्रतिनिधि गुलाम अहमद सहित अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद थे। वही सत्ता पक्ष के घटक दलों के कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल द्वारा लगातार दूसरे दिन शनिवार को पाकुड़ सदर अस्पताल, सोनाजोड़ी की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जायजा लेना और खामियों पर फटकार लगाना, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को उजागर करता है। सवाल यह है कि यदि विपक्ष ऐसा करता, तो इसे सरकार को बदनाम करने की साजिश बताया जाता। लेकिन जब सत्ता पक्ष के प्रतिनिधि ही व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं, तो स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की जरूरत साफ जाहिर होती है। हालांकि, अस्पताल की अव्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग के विधायक प्रतिनिधि मुख्तार हुसैन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन समिति की बैठकों में लगातार भागीदारी के बावजूद पहले इन समस्याओं को प्रमुखता से क्यों नहीं उठाया गया? क्या पूर्व और वर्तमान चिकित्सा पदाधिकारियों के साथ तालमेल की कमी इसकी वजह है? हालांकि, इन सवालों का जवाब स्पष्ट होना बाकी है। अस्पताल की अव्यवस्थाएं अचानक पैदा नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे गंभीर रूप लेती है। अब देखना होगा कि आने वाले समय में इन कमियों को किस हद तक दूर किया जाता है। अस्पताल के सीएस/डीएस और प्रबंधन को मरीजों की सुविधाओं एवं स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

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