बेतुल
बैतूल आदिवासी जनप्रतिनिधि का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी कांग्रेस : धरमू सिंग सिरसाम
केंद्रीय राज्य मंत्री डीडी उइके के मामले में पूर्व विधायक ने भाजपा सरकार को घेरा, मंच पर फूलों की टोकरी थमाने और वायरल गाली-गलौज वीडियो पर उठाए सवाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। आदिवासी समाज से एक पूर्व विधायक ने हिम्मत दिखाइ जनप्रतिनिधि का अपमान कांग्रेस किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। केंद्रीय राज्य मंत्री एवं बैतूल सांसद दुर्गादास (डीडी) उइके के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार और उनके सम्मान से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर भैंसदेही के पूर्व कांग्रेस विधायक धरमू सिंग सिरसाम ने यह बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगातार आदिवासियों का अपमान हो रहा है। सिरसाम ने कहा कि दुर्गादास उइके भले ही दूसरी राजनीतिक पार्टी से जुड़े हों, लेकिन वे एक आदिवासी जनप्रतिनिधि हैं और उनके सम्मान की रक्षा के लिए आवाज उठाना हर आदिवासी का कर्तव्य है।
पूर्व विधायक सिरसाम ने 31 अक्टूबर को बैतूल के पुलिस परेड मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में सरकारी मंच पर केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके के हाथों में फूलों की टोकरी थमाई गई। जबकि मंच पर अन्य कार्यकर्ता भी मौजूद थे। उन्होंने सवाल उठाया कि एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री के पद और गरिमा के अनुरूप व्यवस्था क्यों नहीं की गई? उनके मुताबिक, यह घटनाक्रम जनप्रतिनिधि के सम्मान और प्रोटोकॉल की अनदेखी का मामला है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 31 अक्टूबर को बैतूल के पुलिस परेड मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस राशि वितरित करने के साथ जिले में विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान सांसद डीडी उइके के हाथों में फूलों से भरी टोकरी की तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसको लेकर सवाल उठाए गए। विभिन्न सामाजिक मंचों ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी थी।
सिरसाम ने 18 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर वायरल हुए गाली-गलौज के वीडियो पर भी नाराजगी जताई। इस वीडियो में सांसद डीडी उइके के प्रति कथित तौर पर अभद्र भाषा और अपशब्दों का इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया था। पूर्व विधायक ने कहा कि वीडियो सार्वजनिक होने के बावजूद संबंधित लोगों के खिलाफ शासन-प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई नहीं होना आदिवासी जनप्रतिनिधियों के प्रति सरकार के रवैये पर सवाल खड़े करता है।



