बेतुल
बैतूल जर्जर भवन और टिन शेड के सहारे नौनिहालों का भविष्य
आठनेर के वन ग्राम बागवानी में शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल, ग्रामीणों ने दी जनप्रतिनिधियों के बहिष्कार की चेतावनी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। विकासखंड आठनेर अंतर्गत आने वाले वन ग्राम बागवानी से सरकारी शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक दावों की हकीकत उजागर करती एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। देश की आजादी के सात दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस आदिवासी अंचल के बच्चे बुनियादी शैक्षणिक सुविधाओं से वंचित हैं और जर्जर भवन के साए में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल भवन की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि उसकी छत तक नहीं बची है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए ग्रामीणों ने खुद पहल करते हुए जमीन पर टिन शेड डालकर अस्थायी वैकल्पिक व्यवस्था बनाई है, जहां देश का भविष्य खुले आसमान के नीचे जमीन पर बैठकर पढ़ने को विवश है।
इस गंभीर स्थिति को उजागर करते हुए आठनेर जिला पंचायत वार्ड क्रमांक 19 के सदस्य रामचरण इरपाचे ने शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ देश के प्रधानमंत्री शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ बैतूल के इस आदिवासी क्षेत्र में जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण सरकारी दावों की हकीकत सामने आ रही है। स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग की उदासीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले पांच वर्षों से विभाग केवल कागजी आश्वासन दे रहा है कि नया स्कूल भवन स्वीकृत हो चुका है। इस दौरान कलेक्टर सहित कई प्रशासनिक अधिकारी निरीक्षण के लिए आए और लिखित जानकारी लेकर गए, लेकिन पांच साल बीत जाने के बाद भी धरातल पर नया भवन नहीं बन सका है।
कागजी दावों और लगातार मिल रहे आश्वासनों से तंग आ चुके स्थानीय आदिवासियों में अब भारी आक्रोश है। जनप्रतिनिधि रामचरण इरपाचे के अनुसार, सरकार और शिक्षा विभाग ग्रामीण क्षेत्रों के भोले-भाले आदिवासियों को गुमराह कर उनके बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। लगातार हो रही उपेक्षा के विरोध में अब ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और राजनीतिक दलों के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने की तैयारी कर ली है। गांव में जल्द ही एक प्रतिबंधात्मक बोर्ड लगाने की तैयारी की जा रही है, जिस पर स्पष्ट लिखा होगा कि इस गांव में शासकीय कर्मचारियों और राजनीतिक जनप्रतिनिधियों का घुसना मना है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि मासूम बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए शीघ्र पक्के स्कूल भवन और आवश्यक सुविधाओं का प्रबंध किया जाए।




