जालौन

फिफ्टी-फिफ्टी के खेल में शामिल नहीं हुआ प्रधान तो ग्राम विकास अधिकारी ने हाजीपुर में विकास कार्य रोके

हाजीपुर में तैनात ग्राम विकास अधिकारी के विरुद्ध प्रधान की शिकायत का नहीं हुआ निस्तारण

जिम्मेदार अधिकारी शासन, प्रशासन से की गई शिकायत पर नहीं दिखा रहे गंभीरता
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
कुठौंद (जालौन)। विकासखंड कुठौंद की ग्राम पंचायत हाजीपुर में 2024-25 से लेकर आज तक ग्राम विकास अधिकारी जयसिंह यादव द्वारा कोई भी विकास कर नहीं कराया गया है। जिसमें ग्राम प्रधान द्वारा लिखित शिकायती पत्र डीडीओ  को उनके  का कार्यशैली के संबंध में दिया गया था। ग्राम पंचायत हाजीपुर में ग्राम निधि की धनराशि 23 दिसंबर 2025 में 6 लाख 96 हजार 370 रुपए आये थे। 31 दिसम्बर 789012 सात लाख नवासी हजार बारह रुपए सन् 2024 में धनराशि प्राप्त होने के बाबजूद ग्राम विकास अधिकारी द्वारा कोई भी विकास नहीं किया। प्रधान द्वारा लाख कोशिशों के बावजूद भी ग्राम विकास अधिकारी ने एक भी बात नहीं सुनी।
ग्राम विकास अधिकारी की इस तरह की कार्यशैली से हताश होकर डीडीओ को शिकायती पत्र दिया था। इसके बाद भी ग्राम विकास अधिकारी जयसिंह यादव के द्वारा किए जा रहे क्रियाकलापों पर आला अधिकारियों ने कोई तबज्जों नहीं दी। ग्राम प्रधान का कहना था कि ग्राम विकास अधिकारी कहते हैं कि हमारे पास कई ग्राम पंचायतें है जिसमें हम आधे आधे पर काम करवाते हैं। ग्राम पंचायत में जितने विकास कार्य प्रधान द्वारा करवाए गए हैं। जिनका भुगतान भी नहीं कराया गया है ।जैसे की इंटरलॉक, हैंडपंप रीवोर तथा गोपालक का मानदेय शौचालय में तैनात केयर टेकर का मानदेय प्रधान का मानदेय पंचायत सहायक का मानदेय न दिए जाने के संबंध की इस प्रकार की गतिविधियों की जांच कराई जाने की मांग की गई थी। इसी प्रकार की गतिविधियों के चलते ग्राम पंचायत दमरास में निलंबित भी हुए थे। जिससे ग्राम पंचायत के ग्रामीणों को शासन द्वारा दिए गए विकास कार्य की योजनाओं का लाभ प्राप्त हो सके। एक और बड़ी दिलचस्प बात यह है कि ग्राम विकास अधिकारी गौशाला के रजिस्टर को अपने पास ही रखते हैं। अपनी मनमर्जी से डिमांड लगाते हैं और अपनी मनमर्जी से ही हर कार्य को किया करते हैं। ग्राम प्रधान से कभी भी किसी भी प्रकार की ग्राम पंचायत के संबंध में बात नहीं की जाती है और ना ही यह मौके पर कभी गांव में आते हैं । इनके दलाल लगे हैं वही ग्राम पंचायत का संचालन कर रहे हैं। इसलिए शासन व प्रशासन से इस तरह की आशाओं के साथ गुहार लगाते हुए ग्राम पंचायत प्रधान द्वारा जांच किए जाने की मांग की गई थी। क्योंकि वर्तमान समय में ग्राम पंचायत का भविष्य अंधकार में डूबा हुआ है। शिकायत किए दो माह बीत गए इसके उपरांत भी कोई निष्पक्ष कार्यवाही ग्राम विकास अधिकारी पर नहीं की गई। समस्या का निस्तारण करने के लिए कहा था। लेकिन प्रधान द्वारा की गई शिकायत का किसी भी प्रकार से निस्तारण नहीं किया गया। इस प्रकार की कार्यशैली पर प्रधान तथा ग्रामीणों का भी भरोसा टूट गया है।
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