सिंगरौली

शासकीय भूमि पर माफियाओं का कब्जा

बेदखली आदेश के बाद भी कार्रवाई ठप

 बरगवां तहसील के गडेरिया में आराजी नंबर 8 पर अवैध बाउंड्रीवाल, प्रशासनिक निष्क्रियता पर उठे सवाल
डगा की आराजी नंबर 2130  में भी कार्यवाही का इंतजार 
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। जिले में शासकीय भूमि पर कब्जे का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला तहसील बरगवां अंतर्गत ग्राम गडेरिया की आराजी नंबर 8 से जुड़ा है, जहां एक चर्चित भू-माफिया द्वारा सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर बाउंड्रीवाल का निर्माण कर लिया गया है। खास बात यह है कि इस मामले में तहसीलदार बरगवां द्वारा अतिक्रमणकारी के खिलाफ बेदखली का आदेश जारी करते हुए 5 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया जा चुका है, इसके बावजूद आज तक न तो जमीन खाली कराई गई और न ही किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई सामने आई है। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब प्रशासन स्वयं आदेश जारी कर चुका है, तो फिर उस पर अमल क्यों नहीं हो रहा। एसडीएम देवसर और तहसीलदार बरगवां की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज है।
       आरोप लग रहे हैं कि कहीं न कहीं जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता या मिलीभगत के कारण ही अतिक्रमणकारी के हौसले बुलंद हैं। जानकारी के अनुसार अतिक्रमणकारी ने इस कार्रवाई को रोकने के लिए न्यायालय से स्थगन आदेश (स्टे) लेने का प्रयास भी किया था, लेकिन उसे राहत नहीं मिल सकी। इसके बावजूद मौके पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। यह स्थिति प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर सवाल खड़े करती है। अतिक्रमणकारी द्वारा भ्रम फैलाने की भी कोशिश की जा रही है। वह यह दावा कर रहा है कि गडेरिया की आराजी नंबर 8 शासकीय भूमि है, जबकि डगा की आराजी नंबर 2157 उसकी निजी भूमि है। इसी भ्रम का सहारा लेकर उसने शासकीय जमीन पर बाउंड्रीवाल खड़ी कर पूरी भूमि पर कब्जा जमा लिया है और अब जमीन की लोकेशन को लेकर गुमराह कर रहा है।
हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जिस स्थान पर आराजी नंबर 8 स्थित है, उसके आसपास एक पेट्रोल पंप संचालित है, जो स्पष्ट रूप से गडेरिया में स्थित है। यदि अतिक्रमणकारी के दावे को सही माना जाए तो उक्त पेट्रोल पंप डगा में आना चाहिए, जो कि वास्तविक स्थिति से बिल्कुल विपरीत है। इससे साफ जाहिर होता है कि जमीन की पहचान को लेकर जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा है।
 ब्लास्टिंग का असर पेट्रोल पंप पर
 इतना ही नहीं, पेट्रोल पंप के ठीक पीछे एक स्टोन क्रेशर भी संचालित है, जहां नियमित रूप से ब्लास्टिंग की जाती है। इस ब्लास्टिंग का असर पेट्रोल पंप तक महसूस किया जा रहा है, जो एक गंभीर सुरक्षा जोखिम है। इसके बावजूद प्रशासन की चुप्पी कई सवालों को जन्म दे रही है। पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शासकीय जमीन पर अतिक्रमण की पुष्टि हो चुकी है और बेदखली आदेश भी जारी है, तो आखिर कार्रवाई में देरी क्यों? क्या राजस्व विभाग पर किसी प्रकार का दबाव है या फिर यह सब मिलीभगत का नतीजा है? फिलहाल यह मामला प्रशासन की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है।
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