
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी गाजियाबाद : नगर पालिका परिषद की लापरवाही का जीता जागता उदाहरण बन चुका डाबर तालाब अब लोगों के बीच “मौत का कुआं” कहलाने लगा है। गुरुवार सुबह यहां एक और दर्दनाक घटनाक्रम सामने आया 9 दिन पूर्व से लापता युवक का सड़ा-गला शव बरामद हुआ, लेकिन उसे ढूंढने के लिए तालाब में उतरा गोताखोर खुद ही लापता हो गया।
जानकारी के अनुसार अंकुर विहार थाना क्षेत्र की कमल विहार, नसबंदी कॉलोनी निवासी करीब 18 वर्षीय शादान 14 अप्रैल से लापता था। गुरुवार सुबह करीब 9:30 बजे गोताखोरों की मदद से उसका शव कॉलोनी के पास स्थित डाबर तालाब से बरामद किया गया। शव की स्थिति बेहद खराब थी, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह कई दिनों से पानी में पड़ा होने के कारण सडा हुआ था।
लेकिन इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक और हादसा हो गया। दिल्ली के जगतपुर गांव से बुलाया गया गोताखोर सरताज उर्फ भूरा भी तालाब में उतरते ही लापता हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शादान का शव मिलने के बाद जब अन्य गोताखोर बाहर लौट आए, तब सरताज वापस नहीं आया। आशंका है कि वह तालाब के दलदल में फंसकर डूब गया। फिलहाल पुलिस और गोताखोरों की टीम उसकी तलाश में जुटी हुई है।
गौरतलब है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इसी तालाब में रविवार को एक 7 वर्षीय बच्चे की भी डूबने से मौत हो गई थी, जो पतंग के पीछे दौड़ते हुए संतुलन खो बैठा था। दो दिन बाद उसका शव बरामद हुआ था। इस तरह एक सप्ताह में यह तालाब तीन जिंदगियां निगल चुका है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि तालाब के आसपास न तो कोई चारदीवारी है, न बैरिकेडिंग और न ही कोई चेतावनी बोर्ड। ऊपर से गंदगी और अतिक्रमण ने इसे दलदल में तब्दील कर दिया है, जिससे इसकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो गया है।
लोगों का आरोप है कि प्रशासन को कई बार इस तालाब की खतरनाक स्थिति के बारे में अवगत कराया गया, लेकिन हर बार शिकायत की अनदेखी की गई। अब लगातार हो रही मौतों के बाद भी अगर जिम्मेदार अधिकारी नहीं जागे, तो यह लापरवाही और भी भारी पड़ सकती है।
स्थानीय पार्षद अंकुर जैन ने प्रशासन से तालाब के चारों ओर सुरक्षा दीवार, बैरिकेडिंग और नियमित सफाई कराने की मांग की है। फिलहाल पुलिस ने शादान के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और लापता गोताखोर की तलाश जारी है।
डाबर तालाब की यह स्थिति न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि समय रहते कदम न उठाने की कीमत आम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है।





