बागपत

दिल से दिल तक की चिकित्सा: डॉ. अर्पित तोमर से विशेष बातचीत

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बागपत। बागपत जनपद के बड़ौत नगर से जुड़े युवा, प्रतिभाशाली और समर्पित हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्पित तोमर आज चिकित्सा जगत में एक प्रतिष्ठित नाम बन चुके हैं। DM कार्डियोलॉजी जैसी उच्च चिकित्सा उपाधि प्राप्त कर चुके डॉ. तोमर ने हैदराबाद के प्रसिद्ध यशोदा हॉस्पिटल में बतौर एक्स-कंसल्टेंट सेवाएं दीं, साथ ही ESI हैदराबाद में भी अपनी विशेषज्ञता से अनगिनत मरीजों को नई जिंदगी देने का कार्य किया। वर्तमान में बड़ौत के गांधी रोड स्थित धर्मा नेत्र चिकित्सालय से जुड़े रहकर वे जनसामान्य के बीच स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश भी दे रहे हैं।
इन्हीं से हुई विशेष बातचीत के प्रमुख अंश प्रस्तुत हैं—
प्रश्न 1: डॉ. साहब, आपकी प्रारंभिक शिक्षा से लेकर कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ बनने तक का सफर कैसा रहा?
डॉ. अर्पित तोमर:
मेरा मानना है कि चिकित्सा केवल पेशा नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण का माध्यम है। प्रारंभिक शिक्षा के दौरान ही विज्ञान और मानव शरीर की जटिलताओं को समझने में रुचि बढ़ी। MBBS के बाद मैंने मेडिसिन के क्षेत्र में गहराई से अध्ययन किया और फिर DM कार्डियोलॉजी का लक्ष्य चुना। यह सफर आसान नहीं था—लंबी पढ़ाई, कठिन प्रशिक्षण, आपातकालीन परिस्थितियां—लेकिन हर चुनौती ने मुझे बेहतर चिकित्सक बनाया।
प्रश्न 2: यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में अनुभव कैसा रहा?
डॉ. अर्पित तोमर:
यशोदा हॉस्पिटल में काम करना मेरे करियर का अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय रहा। वहां अत्याधुनिक तकनीक, अनुभवी चिकित्सकों की टीम और जटिल हृदय रोगों के उपचार का व्यापक अनुभव मिला। हार्ट अटैक, एंजियोप्लास्टी, ब्लॉकेज, हाईपरटेंशन और हार्ट फेल्योर जैसे मामलों में प्रत्यक्ष अनुभव ने मुझे यह सिखाया कि समय पर निदान ही सबसे बड़ी जीवन रक्षा है।
प्रश्न 3: ESI हैदराबाद में आपकी भूमिका क्या रही?
डॉ. अर्पित तोमर:
ESI में बड़ी संख्या में मध्यमवर्गीय और श्रमिक वर्ग के मरीज आते हैं। वहां काम करते हुए मैंने महसूस किया कि हृदय रोग केवल अमीर या बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गया, बल्कि तनाव, गलत खानपान, धूम्रपान और अनियमित जीवनशैली के कारण युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। मेरा प्रयास हमेशा यही रहा कि मरीजों को सिर्फ दवा नहीं, बल्कि जागरूकता भी दी जाए।
प्रश्न 4: आजकल युवाओं में हार्ट अटैक के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
डॉ. अर्पित तोमर:
इसके पीछे कई कारण हैं—
तनाव,
फास्ट फूड,
नींद की कमी,
धूम्रपान,
व्यायाम का अभाव,
और अनियंत्रित ब्लड प्रेशर/डायबिटीज।
आज का युवा शरीर से ज्यादा स्क्रीन से जुड़ा है। यदि 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित BP, शुगर और लिपिड प्रोफाइल जांच कराई जाए तो कई गंभीर स्थितियों से बचा जा सकता है।
प्रश्न 5: ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए आपका क्या संदेश है?
डॉ. अर्पित तोमर:
ग्रामीण भारत में अक्सर सीने के दर्द को गैस या सामान्य कमजोरी समझ लिया जाता है, जो खतरनाक हो सकता है। यदि सीने में दबाव, सांस फूलना, बाएं हाथ में दर्द, अत्यधिक पसीना या बेचैनी हो तो तुरंत ECG और चिकित्सकीय सलाह लें। गांवों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना बहुत जरूरी है।
प्रश्न 6: धर्मा नेत्र चिकित्सालय, गांधी रोड बड़ौत से जुड़ाव को आप कैसे देखते हैं?
डॉ. अर्पित तोमर:
अपने क्षेत्र और अपने लोगों से जुड़ाव हमेशा विशेष होता है। मेरा प्रयास है कि बड़े शहरों में अर्जित अनुभव का लाभ स्थानीय जनता तक पहुंचे। छोटे शहरों और कस्बों में सही स्वास्थ्य परामर्श पहुंचना भी उतना ही आवश्यक है जितना महानगरों में सुपरस्पेशियलिटी उपचार।
प्रश्न 7: क्या केवल दवा से हृदय रोग नियंत्रित हो सकता है?
डॉ. अर्पित तोमर:
दवा महत्वपूर्ण है, लेकिन जीवनशैली उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।
रोज 30 मिनट पैदल चलना
संतुलित आहार
धूम्रपान से दूरी
नियमित जांच
मानसिक तनाव नियंत्रण
ये पांच बातें हृदय को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकती हैं।
प्रश्न 8: एक डॉक्टर के रूप में आपकी सबसे बड़ी संतुष्टि क्या है?
डॉ. अर्पित तोमर:
जब कोई गंभीर मरीज स्वस्थ होकर मुस्कुराते हुए अपने परिवार के पास लौटता है, वही मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है। डॉक्टर का असली सम्मान मरीज का विश्वास है।
सुरेंद्र मलानिया की कलम से
डॉ. अर्पित तोमर उन युवा विशेषज्ञों में शामिल हैं जिन्होंने आधुनिक चिकित्सा ज्ञान को सेवा भावना से जोड़ा है। हैदराबाद जैसे बड़े चिकित्सा केंद्रों का अनुभव और अपने क्षेत्र के प्रति जुड़ाव उन्हें विशेष बनाता है। उनका संदेश स्पष्ट है—
“हृदय को स्वस्थ रखना अस्पताल पहुंचने से पहले शुरू होता है।”
आज जब बदलती जीवनशैली हृदय रोगों को तेजी से बढ़ा रही है, तब डॉ. अर्पित तोमर जैसे विशेषज्ञ समाज को केवल उपचार ही नहीं, बल्कि जागरूकता की नई दिशा भी दे रहे हैं।
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