
बालाघाट के बिरसा क्षेत्र में मवेसी व्यापारी से लूट का आरोप
पत्रकारिता की साख पर उठे सवाल
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) : जिले में पत्रकारिता का चोला ओढ़े कुछ कथित चेहरे ऐसे बेनकाब हुए हैं, जिन्होंने कलम की स्याही को शर्मिंदा कर दिया। जो कभी कैमरे के सामने “सच्चाई दिखाने” का दावा करते थे, अब खुद पुलिस की केस डायरी में अपनी कहानी लिखवा रहे हैं।
मामला बिरसा थाना क्षेत्र के ग्राम कनिया मेन रोड का है, जहां 17 मई की तड़के करीब 5:30 बजे मवेसी व्यापारी और उसके मजदूरों के साथ मारपीट और लूट की वारदात सामने आई। आरोप है कि हिमांशु जैन और विजय चौधरी नाम के दो कथित पत्रकार अपने साथियों भूरा और निखिल के साथ पहुंचे और पहले दबंगई दिखाई, फिर चाकू की नोक पर करीब 70 हजार रुपये लेकर फरार हो गए। बताया जा रहा है कि “खबरों का सच” दिखाने निकले ये चेहरे उस वक्त खुद अपराध की पटकथा लिख रहे थे। फर्क सिर्फ इतना था कि इस बार कैमरा किसी और के हाथ में था और तस्वीर इनके चेहरे की खिंच रही थी। घटना के बाद बिरसा थाना पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई एक कार जब्त कर ली है, जबकि दूसरी स्कॉर्पियो से कुछ आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। हिमांशु जैन और विजय चौधरी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जबकि नामजद दो आरोपी भूरा औऱ निखिल फरार है! इस पूरे घटनाक्रम ने जिले की पत्रकारिता पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। जिन कंधों पर समाज सच दिखाने की जिम्मेदारी रखता है, अगर वही चाकू की नोक पर “वसूली पत्रकारिता” करने लगें तो भरोसे की आखिरी दीवार भी दरकने लगती है।
यही है कि कल तक जो दूसरों के “काले कारनामे” कैमरे में कैद करते फिरते थे, आज खुद पुलिस की गिरफ्त में अपनी “ब्रेकिंग न्यूज” बन बैठे हैं। जिले में चर्चा यही है कि कुछ लोगों ने पत्रकारिता को मिशन नहीं, बल्कि “पास और पहचान का लाइसेंस” समझ लिया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है। लेकिन इस घटना ने इतना जरूर साफ कर दिया कि अब समाज भी असली पत्रकार और कथित पत्रकार के बीच फर्क समझने लगा है।



