सीआईआई की सरकार-उद्योग गोलमेज बैठक, झारखंड में खनन एवं निर्माण उपकरण क्षेत्र में निवेश और विकास पर जोर
CII Government-Industry Roundtable Focuses on Investment and Growth in Mining and Construction Equipment Sector in Jharkhand

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
रांची, 19 मई 2026: भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के नेशनल माइनिंग एंड कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट डिवीजन (MCED) द्वारा मंगलवार को रांची में झारखंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सरकार-उद्योग गोलमेज बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में राज्य में खनन, बुनियादी ढांचा, विनिर्माण, तकनीकी नवाचार, निवेश संभावनाओं और सतत विकास को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में झारखंड सरकार की ओर से उद्योग विभाग एवं खान एवं भू-तत्व विभाग के सचिव-सह-जेएसएमडीसी अध्यक्ष अरवा राजकमल, खान निदेशक राहुल कुमार सिन्हा, उद्योग निदेशक विशाल सागर तथा जियाडा एवं जीआईडीको के प्रबंध निदेशक वरुण रंजन शामिल हुए। उद्योग जगत की ओर से सीआईआई नेशनल माइनिंग एंड कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट डिवीजन के चेयरमैन एवं टीकेआईएल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक विवेक भाटिया, सीआईआई झारखंड स्टेट काउंसिल के चेयरमैन एवं वैदेही मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक दिलू पारिख तथा टाटा स्टील लिमिटेड के उपाध्यक्ष डी.बी. सुंदरारामन सहित खनन एवं निर्माण उपकरण क्षेत्र से जुड़े कई उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक को संबोधित करते हुए सचिव अरवा राजकमल ने कहा कि झारखंड में विभिन्न क्षेत्रों में लगभग ₹1.5 लाख करोड़ का निवेश पाइपलाइन में है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विकसित झारखंड और आर्थिक समृद्धि की परिकल्पना रखते हैं, जिसमें विस्थापन एवं पुनर्वास के साथ स्थानीय एवं आदिवासी समुदायों की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने बताया कि देश के लगभग 44 प्रतिशत खनिज संसाधन झारखंड में मौजूद हैं, जिससे राज्य खनन आधारित उद्योगों के लिए सबसे उपयुक्त निवेश केंद्र बन सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार झारखंड औद्योगिक विकास नीति को लेकर विभिन्न हितधारकों से सुझाव प्राप्त कर रही है और उद्योग जगत से भी इसमें सहयोग की अपील की। अरवा Rajkamal ने जानकारी दी कि राज्य सरकार रांची में क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स पर केंद्रित “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” स्थापित करने की योजना बना रही है। बैठक में ग्रेफीन, टिकाऊ खनन, ऑर्गेनिक एग्रीकल्चर और आधुनिक तकनीकों के उपयोग जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि सरकार आगामी वर्षों की मांग एवं आवश्यकताओं से जुड़ी जानकारी उद्योग जगत के साथ साझा करेगी, ताकि कंपनियां बेहतर तैयारी कर सकें। साथ ही अगले पांच वर्षों में सरकारी खरीद, निवेश अवसरों और सप्लायर इकोसिस्टम को मजबूत करने पर भी विचार-विमर्श हुआ। उद्योग प्रतिनिधियों ने खदानों के आधुनिकीकरण, तकनीकी उन्नयन, स्किल डेवलपमेंट, सतत विकास तथा सप्लायर नेटवर्क को मजबूत करने जैसे विषयों पर सरकार के साथ सहयोग की इच्छा जताई। साथ ही वर्ष 2030 तक समाप्त होने वाली खदानों, नीलामी प्रक्रिया, भूमि उपलब्धता और नई तकनीकों के तेजी से उपयोग से जुड़ी चिंताओं को भी उठाया गया। सीआईआई एमसीईडी के चेयरमैन विवेक भाटिया ने कहा कि माइनिंग एवं कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर औद्योगिक विकास, आधारभूत संरचना निर्माण और विनिर्माण प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन टेक्नोलॉजी, माइन मॉडर्नाइजेशन और इलेक्ट्रिक उपकरणों की बढ़ती मांग इस क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा करेगी। उन्होंने इन-पिट क्रशिंग एंड कन्वेइंग (IPCC) सिस्टम और कन्वेयर आधारित कोयला परिवहन को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे खनन कार्यों में सुरक्षा और दक्षता दोनों बढ़ेंगी। बैठक में झारखंड सरकार ने आगामी 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले सीआईआई माइनिंग एंड कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट समिट में भाग लेने की सहमति भी जताई। कार्यक्रम का समापन सरकार और उद्योग जगत के बीच दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत करने तथा खनन एवं निर्माण उपकरण क्षेत्र के समग्र विकास के संकल्प के साथ हुआ।



