
कोलकाता । पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भीतर बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता विपक्ष बनाए जाने के दावे और बागी गुट को मिली मंजूरी ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। संदीपन साहा ने पार्टी की खराब स्थिति के लिए अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया। आइए, पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं…
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी घमासान अब और तेज हो गया है। निष्कासित और निलंबित नेताओं के बयानों ने पार्टी के अंदर बड़े विभाजन के संकेत दे दिए हैं। टीएमसी के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि विधानसभा स्पीकर ने उनके गुट की दावेदारी स्वीकार कर ली है। उन्होंने कहा कि टीएमसी विधायक दल उसी गुट का है, जिसके पास पार्टी के चुनाव चिन्ह पर जीतकर आए दो-तिहाई विधायक हैं।
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनका गुट ममता बनर्जी को पत्र लिखकर टीएमसी विधायक दल का चीफ एडवाइजर बनने का अनुरोध करेगा। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि ममता बनर्जी पार्टी को मार्गदर्शन देती रहें। दूसरी तरफ निष्कासित टीएमसी नेता संदीपन साहा ने भी दावा किया कि नेता विपक्ष का कमरा आधिकारिक तौर पर आवंटित हो चुका है और ऋतब्रत बनर्जी वहां बैठ चुके हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि बागी गुट अब खुद को विधानसभा के अंदर असली टीएमसी विधायक दल के रूप में पेश कर रहा है।
ऋतब्रत ने यह भी कहा कि मैंने पार्टी में बात करने की कोशिश की तो पहले तीन दिन तो मुझे घुसने ही नहीं दिया गया। भ्रष्टाचार इस चुनाव का अहम मुद्दा रहा। बार-बार बोलने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि सबूत थे। फिर बोला गया कि चुनाव के बाद कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। अभिषेक बनर्जी चोरों की तरह पिटने के बाद बोले कि आवाम उनकी सुरक्षा करेगी। फिर उनकी तरफ से सुरक्षा के लिए चिट्ठी लिखी गई।
क्या टीएमसी के भीतर दो खेमे बन गए हैं?
टीएमसी के भीतर अब खुलकर दो धड़े दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी का आधिकारिक गुट है, जबकि दूसरी तरफ बागी विधायक हैं जो खुद को असली विधायक दल बता रहे हैं। ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि उनके साथ 58 विधायक हैं और दो अन्य विधायक भी जल्द जुड़ सकते हैं। इस दावे ने टीएमसी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर उठाए सवाल
संदीपन साहा ने सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली को पार्टी की मौजूदा हालत के लिए जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि अगर कोई नेता सफलता का श्रेय लेता है तो उसे हार और संकट की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। इससे पहले भी कई बागी नेता अभिषेक बनर्जी की रणनीति और संगठन संचालन पर सवाल उठा चुके हैं।
क्या टीएमसी नेतृत्व ने बागियों को अवैध बताया?
टीएमसी नेता कुणाल घोष ने बागी गुट के दावों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि निष्कासित विधायक नेता विपक्ष नहीं बन सकते। कुणाल घोष ने कहा कि दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग पत्र दिए गए हैं और कई विधायकों के हस्ताक्षर दोनों पत्रों में हैं। उन्होंने कहा कि मामले की कानूनी और संसदीय जांच होगी और अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा।
क्या बंगाल की राजनीति में बदलेंगे समीकरण?
माना जा रहा है कि अगर बागी गुट मजबूत होता है तो बंगाल विधानसभा के अंदर शक्ति संतुलन बदल सकता है। टीएमसी के भीतर यह टकराव आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है। भाजपा भी इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है और इसे टीएमसी की अंदरूनी कमजोरी के तौर पर देख रही है।



