
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
उरई। नगर पालिका परिषद में विकास कार्यों और भुगतान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जहां एक ओर केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा विकास योजनाओं को गति देने और जनप्रतिनिधियों से सकारात्मक सहयोग की अपेक्षा की जा रही है, वहीं दूसरी ओर नगर पालिका के कुछ निर्वाचित सभासदों पर विकास कार्यों में व्यवधान उत्पन्न करने तथा व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता देने के आरोप सामने आए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पालिका में लंबे समय से लंबित कुटेशन आधारित भुगतानों को लेकर कुछ सभासदों और प्रशासन के बीच मतभेद की स्थिति बनी हुई है। आरोप है कि संबंधित जनप्रतिनिधि अपने प्रभाव क्षेत्र से जुड़े ठेकेदारों के भुगतान को प्राथमिकता दिलाने के लिए दबाव की राजनीति कर रहे हैं। वहीं विभागीय स्तर पर इन भुगतानों की प्रक्रिया पर रोक लगाए जाने के बाद विवाद और अधिक गहरा गया।
सूत्रों के अनुसार, पालिका बोर्ड की बैठकों और विभिन्न अवसरों पर कुछ सभासदों द्वारा विरोध-प्रदर्शन कर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि जिन कार्यों के भुगतान की मांग की जा रही है, उनमें से कई कार्यों की वास्तविक स्थिति और क्रियान्वयन को लेकर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
विवाद के केंद्र में कई सभासदों और उनसे जुड़े ठेकेदारों के नाम चर्चा में हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि कुछ जनप्रतिनिधियों ने अपने निकटस्थ व्यक्तियों अथवा निर्धारित फर्मों के माध्यम से कुटेशन आधारित कार्यों के भुगतान का दावा प्रस्तुत किया है। इन मामलों में लाखों रुपये के भुगतान को लेकर प्रशासनिक स्तर पर आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
मामला अब जिला प्रशासन तक पहुंच चुका है। संबंधित प्रकरण की लिखित शिकायत जिलाधिकारी को सौंपे जाने के बाद जांच की मांग तेज हो गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भुगतान की मांग वास्तविक कार्यों के आधार पर की गई है अथवा इसमें किसी प्रकार की अनियमितता निहित है।
फिलहाल नगर पालिका की सियासत में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदार पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है।


