जालौन

रिटेनिंग वॉल, मोरी घाट मंदिर पर मंड़राया खतरा, वन विभाग ने तेज की जांच

 ग्राम प्रधान पवनदीप निषाद की शिकायत प्रथम दृष्टया सही

एसडीएफओ ने मौके पर जांच कर मांगी लेखपाल से भूमि की आख्या
 यमुना तट पर अवैध खनन की शिकायत सही मिली, वन रेंजर से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
वन विभाग के संरक्षण में ऐतिहासिक किला जो रानी लक्ष्मीबाई का मंत्रणा कक्ष रहा
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
कालपी (जालौन)। ग्राम पंचायत कीरतपुर के ग्राम प्रधान पवनदीप निषाद द्वारा यमुना तट पर अवैध खनन, रिटेनिंग वॉल को क्षति पहुंचाने तथा ओवरलोड वाहनों के संचालन को लेकर की गई शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद वन विभाग हरकत में आ गया है। उप प्रभागीय वनाधिकारी (एसडीएफओ) सतेन्द्र तोमर ने रविवार को मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया और पूरे मामले की गहन जांच की।
निरीक्षण के दौरान एसडीएफओ ने शिकायतकर्ता ग्राम प्रधान पवनदीप निषाद के बयान दर्ज किए तथा घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में शिकायत के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर संबंधित भूमि के स्वामित्व एवं अभिलेखीय स्थिति स्पष्ट करने के लिए वन रेंजर कालपी से विस्तृत आख्या (रिपोर्ट) तलब की गई है। शिकायत के अनुसार रिटेनिंग वॉल के सपोर्टिंग पिलरों को क्षतिग्रस्त कर अवैध रास्ता बनाया जा रहा है। साथ ही भारी ओवरलोड डंपरों की लगातार आवाजाही से करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित रिटेनिंग वॉल एवं वन विभाग के संरक्षण में स्थित ऐतिहासिक दुर्ग, जिसे स्थानीय स्तर पर वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के इतिहास से जुड़ा तथा उनके मंत्रणा कक्ष के रूप में जाना जाता है, पर भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। यमुना तट पर लगातार हो रहे अवैध खनन से नदी कटान बढ़ रहा है, जिससे पर्यावरण के साथ-साथ तटवर्ती क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है। ग्राम प्रधान पवनदीप निषाद ने बताया कि यदि समय रहते अवैध खनन और ओवरलोड वाहनों पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो वन विभाग का ऐतिहासिक किला, मोरी घाट मंदिर तथा यमुना तट की अन्य ऐतिहासिक धरोहरें गंभीर खतरे की जद में आ सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का भी विषय है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि 10 मार्च को अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण किए जाने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई थी। मुख्यमंत्री कार्यालय में ऑनलाइन शिकायत दर्ज होने के बाद वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रक्रिया को गति दी है। उप प्रभागीय वनाधिकारी सतेन्द्र तोमर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाई गई है। वन रेंजर की आख्या एवं संबंधित अभिलेख प्राप्त होने के बाद विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर शासन एवं उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी, ताकि नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार मनोज पाण्डेय ने जांच अधिकारी को किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि यह किला क्षेत्र की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है और इसके संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए प्रभावी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने हेतु आवश्यक कदम उठाने की मांग भी की। जांच के दौरान एसडीओ रवि कटियार, वन रेंजर देवेंद्र कुमार, वन दरोगा अजीत कुमार तथा लेखपाल जितेंद्र यादव भी मौके पर उपस्थित रहे।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button