गाजियाबाद
आई जी आर एस बना मजाक
लोनी में बिना जांच समस्या का 'समाधान', फर्जी रिपोर्टों से शिकायतकर्ताओं का अधिकारियों से भरोसा टूटा ।
पुलिस, नगरपालिका, विकास, विद्युत और सिंचाई विभाग में झूठे निस्तारण की होड़, अधिकारी कार्यालय में बैठकर बंद कर रहे शिकायतें
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी, गाजियाबाद। प्रदेश सरकार जहां आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण के लिए लगातार सख्ती बरत रही है, वहीं लोनी में यह व्यवस्था मजाक बनकर रह गई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अधिकांश विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे बिना ही कार्यालय में बैठकर शिकायतों का निस्तारण कर रहे हैं। इतना ही नहीं, कई मामलों में शिकायतकर्ता से बात तक नहीं की जाती, लेकिन पोर्टल पर उसे “संतुष्ट” दिखाकर शिकायत बंद कर दी जाती है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब वे निस्तारण रिपोर्ट पढ़ते हैं तो पता चलता है कि उनकी मूल समस्या जस की तस बनी हुई है, जबकि रिपोर्ट में फर्जी तथ्यों के आधार पर समाधान दर्शा दिया गया है। कई बार जांच रिपोर्ट में ऐसी बातें लिखी जाती हैं जिनका वास्तविक स्थिति से कोई संबंध नहीं होता।
सबसे गंभीर बात यह है कि पुलिस विभाग, नगरपालिका, विकास विभाग, विद्युत विभाग और सिंचाई विभाग के बीच मानो झूठे निस्तारण की प्रतिस्पर्धा चल रही हो। जनसमस्याओं का समाधान करने के बजाय पोर्टल पर शिकायतें बंद करने की जल्दबाजी दिखाई देती है, जिससे आईजीआरएस का उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है।
हाल ही में जिलाधिकारी द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि आईजीआरएस शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण हो तथा शिकायतकर्ता की संतुष्टि का विशेष ध्यान रखा जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि शिकायतें डिफॉल्टर श्रेणी में नहीं जानी चाहिए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। इसके बावजूद लोनी में कई विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिकायतों की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए और मौके पर जाकर जांच की जाए तो बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आ सकते हैं, जिनमें बिना वास्तविक कार्रवाई के शिकायतों का निस्तारण दिखा दिया गया है।
जनता ने जिलाधिकारी और शासन से मांग की है कि लोनी में आईजीआरएस पर बंद की गई शिकायतों का रैंडम ऑडिट कराया जाए, शिकायतकर्ताओं से सीधे फीडबैक लिया जाए तथा फर्जी निस्तारण करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि शिकायत निवारण प्रणाली पर जनता का विश्वास बहाल हो सके।


