मेरठ
श्रीराम कथा के तीसरे दिन कार्तिकेय जन्म का रहस्य एवं श्रीराम जन्म प्रसंग का हुआ भावपूर्ण वर्णन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मेरठ। बागपत रोड स्थित दशमेश नगर के शिव मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने भक्ति एवं श्रद्धा के साथ कथा का श्रवण किया। कथा के दौरान भगवान शिव-पार्वती विवाह के उपरांत भगवान कार्तिकेय के जन्म का उद्देश्य, उनका दिव्य स्वरूप तथा भगवान श्रीराम के जन्म प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया गया।
कथा व्यास पंडित श्री जनार्दन तिवारी जी महाराज ने बताया कि देवताओं को तारकासुर नामक अत्याचारी असुर के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान शिव के पुत्र के रूप में कार्तिकेय का अवतार हुआ। ब्रह्माजी के वरदान के कारण तारकासुर का वध केवल भगवान शिव के पुत्र द्वारा ही संभव था। इसी उद्देश्य से भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन के फलस्वरूप भगवान कार्तिकेय का प्राकट्य हुआ। उन्होंने बताया कि कार्तिकेय केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि ज्ञान, विवेक, संगठन शक्ति, अनुशासन और धर्मरक्षा के प्रतीक हैं।
कथा व्यास ने कहा कि कार्तिकेय का जन्म यह संदेश देता है कि जब समाज में भ्रम, कुतर्क, अधर्म और असत्य का प्रभाव बढ़ने लगे, तब निष्ठा, सेवा, साहस और विवेक के माध्यम से उन विकृतियों का नाश किया जा सकता है। भगवान कार्तिकेय ने देवसेना का नेतृत्व कर तारकासुर का वध किया और धर्म की पुनः स्थापना की। उनका जीवन युवाशक्ति को राष्ट्र, समाज और संस्कृति की रक्षा के लिए समर्पित होने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि आज भी समाज में फैले अज्ञान, पाखंड और कुरीतियों का अंत कार्तिकेय के आदर्शों को अपनाकर ही किया जा सकता है। धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि मानव कल्याण, सदाचार और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा है। जब-जब समाज में धर्म का स्वरूप विकृत होता है और लोग स्वयं को ईश्वर से बड़ा मानने लगते हैं, तब परमात्मा किसी न किसी रूप में अवतरित होकर धर्म की पुनर्स्थापना करते हैं।
इसके पश्चात कथा व्यास ने भगवान श्रीराम के जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम का अवतार धर्म, मर्यादा, न्याय और लोकमंगल की स्थापना के लिए हुआ। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी की चौपाई का उल्लेख करते हुए कहा कि-
‘‘जब-जब होइ धरम की हानि, बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी।
तब-तब प्रभु धरि मनुज शरीरा, हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा॥’’
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन मानवता के लिए आदर्श है और उनके चरित्र से सत्य, त्याग, कर्तव्य एवं मर्यादा का पालन करने की प्रेरणा मिलती है। कथा के तीसरे दिन के मुख्य यजमान जयभगवान मित्तल एवं अशोक माहेश्वरी रहे। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्म लाभ प्राप्त किया।




