असम

असम के वनमंत्री जयंत मल्ल बरुवा के राजस्व बढ़ाओ बयान पर पर्यावरणविदों का विरोध। 

 नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 

असम के पर्यावरण एवं वन मंत्री जयंत मल्ल बरुवा  के एक टिप्पणी ने राज्यभर में तीव्र प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है। मंत्री ने कहा कि वे वन विभाग में राजस्व वसूल में कमी रोकना चाहते हैं और विभाग में राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए कदम उठाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वन, वित्त और खनन विभागों के पास राजस्व अर्जन के साधन हैं तथा वन विभाग में राजस्व के रिसाव (leakages) को बंद कर उन्होंने राजस्व संग्रह को 100 प्रतिशत तक सुनिश्चित करने का लक्ष्य बताया।मंत्री के इस रुख के बाद पर्यावरण कार्यकर्ता और प्रकृति प्रेमियों ने तीखी आलोचना की है। वरिष्ठ पर्यावरणविद् अपूर्व बल्लभ गोस्वामी ने कहा कि इस समय सरकार का ध्यान ग्लोबल वार्मिंग जैसे बढ़ते पर्यावरणीय संकटों की ओर होना चाहिए और जंगलों की कटाई रोककर वृक्षारोपण व संरक्षण पर अधिक जोर देना चाहिए। गोस्वामी ने कहा कि एक वन मंत्री का प्रमुख दायित्व वन क्षेत्र और वन्यजीवों का संरक्षण है, न कि राजस्व संग्रह को प्राथमिकता देना। उन्होंने 1996 में उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में फ़ॉरेस्ट कटिंग पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाए गए प्रतिबंध का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को उस दिशा में चलना चाहिए। उधर पर्यावरण कार्यकर्ता दिलीप नाथ ने भी वन मंत्री की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। नाथ ने कहा कि संरक्षित वन, अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों की सुरक्षा, वन भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाना और क्षतिग्रस्त क्षेत्रों में पुनर्वनीकरण ही वन विभाग का मूल उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार केवल राजस्व बढ़ाने को प्राथमिकता देगी तो राज्य के वन्य संपदा को भारी नुकसान होगा। नाथ ने यह भी याद दिलाया कि 1996 के सुप्रीम कोर्ट के अवलोकन के समय देश में आवश्यक 19 प्रतिशत के विपरीत वन आवरण मात्र 11 प्रतिशत के आसपास था, जिसके कारण उत्तर-पूर्व में वनों की कटाई पर पाबंदी लगाई गई थी। पर्यावरणवादी नेताओं ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से भी इस विषय पर हस्तक्षेप की मांग की है और कहा है कि सरकार को राजस्व नीतियों और वन संरक्षण के बीच संतुलन बनाना होगा। इस मामले ने राज्य में वन संरक्षण बनाम राजस्व अर्जन की नीति पर एक सार्वजनिक बहस शुरू कर दी है, और अब सबकी नजरें सरकार की अगली नीति तथा कार्रवाई पर टिकी हैं।

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