बागपत
मैक्स अस्पताल, शालीमार बाग में जटिल स्पाइन सर्जरी का कमाल
छह महीने पुरानी रीढ़ की गंभीर चोट का सफल इलाज, 42 वर्षीय महिला को मिला नया जीवन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बड़ौत/बागपत : कई बार सड़क दुर्घटना या गिरने के बाद होने वाला कमर दर्द सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन यही लापरवाही भविष्य में गंभीर शारीरिक परेशानी का कारण बन सकती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें करीब छह महीने पहले लगी रीढ़ की गंभीर चोट शुरुआती जांच में पकड़ में नहीं आई। समय के साथ दर्द बढ़ता गया, पैरों में कमजोरी आने लगी और 42 वर्षीय महिला के लिए बिना सहारे चलना भी मुश्किल हो गया। अंततः मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, शालीमार बाग के स्पाइन विशेषज्ञों ने जटिल सर्जरी कर महिला को नया जीवन दिया।
शुरुआत में सामान्य समझी गई चोट, लेकिन बढ़ती गई परेशानी
जानकारी के अनुसार, महिला छह महीने पहले गिरकर घायल हो गई थी। दुर्घटना के तुरंत बाद उसे एक स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक जांच में कोई गंभीर चोट सामने नहीं आई। चिकित्सकों ने दर्द निवारक दवाएं देकर घर भेज दिया।
हालांकि आने वाले दिनों और महीनों में उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई। कमर का दर्द असहनीय होता गया और दोनों पैरों तक फैलने लगा। पैरों में कमजोरी, सुन्नपन तथा चलने-फिरने में कठिनाई बढ़ती चली गई। धीरे-धीरे हालात ऐसे हो गए कि महिला के लिए खड़ा होना, बिना सहारे चलना और दैनिक कार्य करना भी बेहद कठिन हो गया।
जब लगातार इलाज के बावजूद राहत नहीं मिली, तब परिजन उसे मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, शालीमार बाग लेकर पहुंचे, जहां स्पाइन विशेषज्ञों ने उसकी विस्तृत जांच की।
एडवांस जांच में सामने आई गंभीर सच्चाई
अस्पताल में एमआरआई एवं अन्य एडवांस इमेजिंग जांच के दौरान पता चला कि महिला की रीढ़ की हड्डी के L3-L4 स्तर पर दोनों तरफ पार्स इंटरआर्टिकुलरिस फ्रैक्चर था। इस फ्रैक्चर के कारण ग्रेड-2 लिस्थेसिस (रीढ़ की हड्डी का खिसकना) विकसित हो चुका था, जिससे नसों पर लगातार दबाव पड़ रहा था। यही कारण था कि महिला के पैरों की ताकत कम होती जा रही थी और चलने-फिरने में गंभीर परेशानी हो रही थी।
समय पर दोबारा जांच जरूरी: डॉ. जितेश मंघवानी
डॉ. जितेश मंघवानी, प्रिंसिपल कंसल्टेंट एवं यूनिट हेड, ऑर्थोपेडिक स्पाइन सर्जरी, मैक्स अस्पताल, शालीमार बाग ने बताया,
“यदि किसी दुर्घटना या गिरने के बाद कमर का दर्द लंबे समय तक बना रहे और उसके साथ पैरों में दर्द, सुन्नपन, कमजोरी या चलने में कठिनाई होने लगे, तो इसे सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार शुरुआती जांच में रीढ़ की कुछ चोटें दिखाई नहीं देतीं। ऐसे मामलों में दोबारा विशेषज्ञ से परामर्श लेकर एडवांस इमेजिंग कराना बेहद आवश्यक होता है, ताकि समय रहते सही उपचार किया जा सके।”
उन्होंने बताया कि इस मरीज में शुरुआती जांच के दौरान पार्स फ्रैक्चर का पता नहीं चल पाया, जिसके कारण रीढ़ अस्थिर होती गई और नसों पर दबाव लगातार बढ़ता रहा।
जटिल MIS-TLIF सर्जरी से मिली राहत
पूरी जांच और मरीज की स्थिति का मूल्यांकन करने के बाद डॉक्टरों ने परिवार को बीमारी और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद विशेषज्ञ टीम ने ट्रांसफोरामिनल लंबर इंटरबॉडी फ्यूजन (TLIF) तकनीक से सफल स्पाइन सर्जरी की।
सर्जरी के दौरान नसों पर पड़ रहे दबाव को सावधानीपूर्वक हटाया गया, रीढ़ की हड्डी को उसकी सही स्थिति में स्थापित किया गया तथा विशेष इम्प्लांट और बोन ग्राफ्ट की सहायता से रीढ़ को स्थिर एवं मजबूत बनाया गया।
छह महीने पुरानी चोट के बावजूद मिली बेहतर रिकवरी
डॉ. जितेश मंघवानी ने बताया,
“सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मरीज हमारे पास चोट लगने के करीब छह महीने बाद पहुंची। तब तक नसों पर लंबे समय तक दबाव रहने से काफी नुकसान हो चुका था। ऐसे मामलों में पूरी तरह रिकवरी को लेकर हमेशा आशंका रहती है, लेकिन समय पर की गई सर्जरी और रीढ़ को स्थिर करने से नसों में अच्छी रिकवरी हुई। आधुनिक मिनिमली इनवेसिव तकनीक MIS-TLIF की मदद से नसों का दबाव कम करने और रीढ़ को मजबूत बनाने का कार्य एक साथ किया जा सकता है। इससे मरीज जल्दी चलने-फिरने लगता है और सामान्य जीवन में लौटने की संभावना काफी बढ़ जाती है।”
फिजियोथेरेपी ने लौटाई सामान्य जिंदगी
सर्जरी के तुरंत बाद महिला के पैरों का तेज दर्द काफी हद तक समाप्त हो गया। इसके बाद विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट की निगरानी में रिहैबिलिटेशन कार्यक्रम शुरू किया गया। नियमित व्यायाम और फिजियोथेरेपी के चलते उसके पैरों की ताकत धीरे-धीरे वापस आने लगी।
कुछ ही सप्ताह में महिला बिना किसी सहारे के खड़ी होने और चलने लगी। अब वह अपने दैनिक कार्य स्वयं करने में सक्षम है और सामान्य जीवन की ओर तेजी से लौट रही है।
विशेषज्ञों की सलाह
स्पाइन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी दुर्घटना, गिरने या भारी चोट के बाद कमर का दर्द लगातार बना रहे या उसके साथ पैरों में दर्द, झनझनाहट, सुन्नपन, कमजोरी अथवा चलने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो केवल दर्द निवारक दवाओं पर निर्भर न रहें। ऐसे मामलों में समय रहते स्पाइन विशेषज्ञ से परामर्श लेकर आवश्यक जांच कराना गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है। समय पर सही निदान और उपचार न केवल स्थायी विकलांगता के खतरे को कम करता है, बल्कि मरीज को सामान्य जीवन में वापस लौटने का अवसर भी देता है।



