बागपत

“आंखें केवल देखने का माध्यम नहीं, बल्कि हर चेहरे की मुस्कान की पहचान हैं”

डॉ. शश्या तोमर (MBBS, MS) – नेत्र रोग विशेषज्ञ से एक भावनात्मक विशेष बातचीत

बड़ौत/बागपत
प्रश्न: डॉक्टर साहिबा, सबसे पहले अपने बचपन और डॉक्टर बनने के सफर के बारे में बताइए।
डॉ. शश्या तोमर:
हर बच्चे की तरह मेरे भी कई सपने थे, लेकिन एक सपना हमेशा दिल के सबसे करीब रहा—ऐसा काम करना जिससे किसी की जिंदगी में सचमुच रोशनी आ सके। परिवार के संस्कार, माता-पिता का विश्वास और शिक्षकों का मार्गदर्शन मुझे इस मुकाम तक लेकर आया। MBBS और फिर MS (नेत्र रोग) की पढ़ाई आसान नहीं थी। अनगिनत रातें जागकर पढ़ाई की, कई कठिन परीक्षाओं का सामना किया, लेकिन हर संघर्ष ने मुझे और मजबूत बनाया।
प्रश्न: आपने नेत्र रोग (Eye Specialist) को ही अपना क्षेत्र क्यों चुना?
डॉ. शश्या तोमर:
क्योंकि आंखें इंसान की सबसे अनमोल धरोहर हैं। जब कोई मरीज धुंधली दुनिया देखकर आता है और इलाज के बाद साफ-साफ अपने बच्चों का चेहरा देख पाता है, तो उसकी आंखों में जो खुशी होती है, वही मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।
प्रश्न: कोई ऐसा मरीज जिसे आप आज भी नहीं भूल पाईं?
डॉ. शश्या तोमर:
ऐसे कई मरीज हैं। एक बुजुर्ग महिला मेरे पास आई थीं। उन्हें मोतियाबिंद के कारण लगभग दिखाई देना बंद हो गया था। ऑपरेशन के बाद जब उन्होंने पहली बार अपने पोते का चेहरा देखा, तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े। उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर कहा—”बेटी, तुमने मेरी दुनिया वापस लौटा दी।” उस दिन महसूस हुआ कि डॉक्टर होना केवल एक पेशा नहीं, बल्कि ईश्वर की दी हुई सेवा है।
प्रश्न: क्या कभी ऐसा समय आया जब आपने खुद को कमजोर महसूस किया?
डॉ. शश्या तोमर:
हर डॉक्टर की जिंदगी में ऐसे पल आते हैं। जब किसी मरीज की पीड़ा देखकर मन भर आता है, जब हर संभव प्रयास के बाद भी परिणाम उम्मीद के अनुसार नहीं मिलते, तब दिल दुखता है। लेकिन वही पल हमें और अधिक जिम्मेदार और संवेदनशील बनाते हैं।
प्रश्न: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में आंखों की सबसे बड़ी समस्या क्या है?
डॉ. शश्या तोमर:
मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का लगातार उपयोग। बच्चे हों या बड़े, सभी घंटों स्क्रीन के सामने रहते हैं। इससे आंखों में सूखापन, जलन, सिरदर्द और दृष्टि संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। समय-समय पर आंखों को आराम देना और नियमित जांच कराना बहुत जरूरी है।
प्रश्न: आपके लिए सबसे बड़ी खुशी क्या है?
डॉ. शश्या तोमर:
जब कोई मरीज इलाज के बाद मुस्कुराते हुए कहता है—”अब मुझे सब साफ दिखाई दे रहा है।” उस मुस्कान की कोई कीमत नहीं होती। वही मेरी सबसे बड़ी कमाई है।
प्रश्न: युवा डॉक्टरों को क्या संदेश देना चाहेंगी?
डॉ. शश्या तोमर:
डिग्री आपको डॉक्टर बनाती है, लेकिन इंसानियत आपको महान डॉक्टर बनाती है। मरीज को केवल बीमारी मत समझिए, उसकी भावनाओं को भी समझिए। दवा के साथ भरोसा और अपनापन भी दीजिए।
प्रश्न: समाज के लिए आपका संदेश?
डॉ. शश्या तोमर:
आंखों की नियमित जांच कराएं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप और बढ़ती उम्र में आंखों का विशेष ध्यान रखें। बच्चों को अत्यधिक मोबाइल से दूर रखें। याद रखिए—आंखों की रोशनी अनमोल है, इसे खोने के बाद उसकी कीमत समझ आती है।
सुरेंद्र मलानिया की कलम से
डॉ. शश्या तोमर केवल एक कुशल नेत्र रोग विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि संवेदनशील व्यक्तित्व की धनी हैं। उनकी बातचीत में विनम्रता, मरीजों के प्रति अपनापन और सेवा का भाव साफ झलकता है। उनके लिए हर सफल उपचार केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि किसी परिवार की जिंदगी में फिर से उजाला लौटाने का माध्यम है। यही भावना उन्हें एक सफल डॉक्टर के साथ-साथ एक प्रेरणादायी इंसान भी बनाती है।
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