ललितपुर
नगर पालिका में नजूल लिपिक पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
हटाने के आदेश के बावजूद कुर्सी पर जमे होने का दावा

पार्षद आलोक कुमार जैन मयूर ने डीएम से की जांच और निलंबन की मांग
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
ललितपुर। नगर पालिका परिषद में तैनात नजूल लिपिक सुधीर कुमार रावत के खिलाफ एक बार फिर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना के गंभीर आरोप सामने आए हैं। वार्ड संख्या-18 (सुभाषपुरा) के पार्षद एवं जिला योजना समिति के सदस्य आलोक कुमार जैन मयूर ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि नपाध्यक्ष द्वारा नजूल कार्य से हटाए जाने के स्पष्ट आदेश के बावजूद सुधीर रावत आज भी उसी पद पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर संबंधित कर्मचारी को तत्काल निलंबित किए जाने की मांग की है। शिकायती पत्र के अनुसार नपाध्यक्ष द्वारा 27 मई 2026 को जारी आदेश (पत्रांक 583(रु)/मु0कार्या0/2026-27) में कनिष्ठ लिपिक सुधीर कुमार रावत को नजूल लिपिक के कार्य से तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया गया था। आदेश में उनके स्थान पर वरिष्ठ लिपिक दीपेन्द्र कुमार को नजूल संबंधी कार्यों का दायित्व सौंपा गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उक्त आदेश के बावजूद सुधीर रावत ने न केवल आदेश का पालन नहीं किया, बल्कि आज भी नजूल सीट पर बने हुए हैं और संबंधित कार्यों का संचालन कर रहे हैं। पार्षद आलोक कुमार जैन ने अपने शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि सुधीर रावत द्वारा शहर में विभिन्न स्थानों पर अवैध रूप से डिब्बे रखवाकर धन उगाही की जा रही है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में सब्जी मंडी क्षेत्र में कथित रूप से अवैध वसूली करते हुए उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, जिसके बावजूद उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों की कथित कृपा के चलते सुधीर रावत को ललितपुर के अलावा तालबेहट और महरौनी क्षेत्रों का अतिरिक्त प्रभार भी मिला हुआ है, जिससे उन्हें महत्वपूर्ण राजस्व संबंधी कार्यों पर प्रभाव बनाए रखने का अवसर मिल रहा है। पार्षद ने यह भी दावा किया है कि वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों के चलते सुधीर रावत पूर्व में तीन बार निलंबित हो चुके हैं और इसका रिकॉर्ड नगर पालिका परिषद के अभिलेखों में उपलब्ध है। शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसे कर्मचारी को दोबारा संवेदनशील और राजस्व से जुड़े पद पर बनाए रखना जनहित के विपरीत है। शिकायती पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि सुधीर रावत की मूल नियुक्ति अनुकम्पा के आधार पर पी.एन. इंटर कॉलेज में लिपिक के पद पर हुई थी, लेकिन उन्हें नगर पालिका में नजूल जैसी महत्वपूर्ण एवं राजस्व से जुड़ी सीट पर तैनात किया गया। पार्षद ने जिलाधिकारी से मांग की है कि उन्हें तत्काल उनके मूल विभाग में भेजा जाए तथा उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार और आदेशों की अवहेलना के आरोपों की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराकर आवश्यक विभागीय कार्रवाई की जाए। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, नगर विकास मंत्री, आयुक्त झांसी मंडल तथा पुलिस अधीक्षक को भी भेजी गई है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर पर कराई जाती है और नपाध्यक्ष के आदेश का पालन न होने के मामले में क्या कार्रवाई की जाती है।


