बेतुल

बैतूल सांदीपनि विद्यालय बैतूल बाजार में नवाचारी खगोलीय मॉडल प्रशिक्षण का समापन

शिक्षकों ने सीखे गतिविधि आधारित शिक्षण के गुर

खगोलीय प्रयोगों और लो-कॉस्ट मॉडल से रोचक बनेगी पढ़ाई
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
बैतूल। सांदीपनि विद्यालय बैतूल बाजार में विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान शिक्षकों के लिए आयोजित तीन दिवसीय नवाचारी क्रियाशील मॉडल एवं खगोलीय प्रयोग/निर्माण प्रशिक्षण का समापन हुआ। प्रशिक्षण के अंतिम दिन शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप गतिविधि आधारित, अनुभवात्मक एवं प्रयोगात्मक शिक्षण की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला में खगोल विज्ञान, इतिहास, भूगोल, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, एरोमॉडलिंग तथा लो-कॉस्ट टीचिंग मटेरियल के माध्यम से प्रभावी शिक्षण की विधियां सिखाई गईं।
कार्यक्रम में लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के अपर संचालक डॉ. मनीष वर्मा ने ऑनलाइन व्याख्यान देते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 का उद्देश्य विद्यार्थियों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच, नवाचार और समस्या समाधान क्षमता विकसित करना है। इसके लिए विद्यालयों में गतिविधि आधारित, परियोजना आधारित तथा कार्यशील मॉडलों पर आधारित शिक्षण को अपनाना जरूरी है। उन्होंने शिक्षकों से पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहकर प्रयोगों और मॉडल आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
– इतिहास और विज्ञान को रोचक बनाने की दी सीख
इतिहास में भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान पर आधारित सत्र में मनोज जैन (उमावि सागर) ने टाइमलाइन आधारित शिक्षण पद्धति का प्रदर्शन किया। उन्होंने ऐतिहासिक घटनाओं को कालक्रम के माध्यम से प्रभावी ढंग से पढ़ाने की तकनीक बताई तथा प्रतिभागी शिक्षकों को टाइमलाइन मॉडल और शिक्षण सामग्री निर्माण का अभ्यास कराया। कार्यक्रम में प्राचार्य सतेन्द्र उदयपूरे ने कहा कि प्रशिक्षण में सीखे गए नवाचार, कार्यशील मॉडल और लो-कॉस्ट टीचिंग मटेरियल का नियमित कक्षा शिक्षण में उपयोग करने से विद्यार्थियों में विषय के प्रति रुचि, रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच विकसित होगी। प्राचार्य राजकुमार मालवीय ने कहा कि जब शिक्षक स्वयं मॉडल और वैज्ञानिक प्रयोग तैयार करते हैं तो विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अधिक प्रभावी ढंग से विकसित होता है।
– डे-टाइम एस्ट्रोनॉमी का दिया प्रशिक्षण
प्रथम तकनीकी सत्र में कार्यक्रम समन्वयक एवं मॉडल निर्माण विशेषज्ञ दीपक सोनी ने डे-टाइम एस्ट्रोनॉमी विषय पर गतिविधि आधारित प्रशिक्षण दिया। इस दौरान प्रतिभागियों को खगोल विज्ञान किट वितरित की गई। शिक्षकों को दिन के समय सूर्य की स्थिति, दिशा निर्धारण, छाया में परिवर्तन, पृथ्वी के घूर्णन तथा सूर्य की आभासी गति को कार्यशील मॉडलों और प्रयोगों के माध्यम से समझाया गया। प्रतिभागियों ने स्वयं मॉडल संचालित कर इन अवधारणाओं का व्यवहारिक अभ्यास किया और विद्यालयों में इनके उपयोग की तकनीक सीखी।
– पोस्ट टेस्ट, फीडबैक और प्रमाण-पत्र वितरण
समापन समारोह में अतिथियों ने प्रशिक्षण को विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए शिक्षकों से अर्जित ज्ञान का प्रभावी उपयोग करने का आह्वान किया। प्रतिभागियों का पोस्ट टेस्ट आयोजित किया गया तथा प्रशिक्षण संबंधी फीडबैक लिया गया। शिक्षक ललित आजाद ने कार्यशाला को व्यवहारिक और कक्षा शिक्षण के लिए उपयोगी बताया, जबकि शिक्षिका पिंकी पाटनकर ने ऐसे प्रशिक्षण नियमित रूप से आयोजित किए जाने की आवश्यकता जताई। समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
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