बेतुल
बैतूल अमृत 2.0 योजना में नाली बने बिना बिछ रही पेयजल लाइन
चिचोली में नाली और पेयजल लाइन को लेकर विवाद, कलेक्टर से मौके के निरीक्षण की मांग

वार्ड क्रमांक 15 की पार्षद नेहा रूपेश आर्य ने जनसुनवाई में की शिकायत
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल/चिचोली। नगर परिषद चिचोली के वार्ड क्रमांक 1 और 15 में अमृत 2.0 जल प्रदाय योजना के तहत बिछाई जा रही पेयजल सप्लाई लाइन और वर्षों से लंबित आरसीसी नाली निर्माण को लेकर जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई गई है। वार्ड क्रमांक 15 की पार्षद नेहा रूपेश आर्य ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर तकनीकी खामियों, नागरिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी संभावित जोखिमों का हवाला देते हुए पहले नाली निर्माण और उसके साथ ही पेयजल पाइपलाइन बिछाने की मांग की है।
शिकायत में बताया गया है कि दोनों वार्डों में प्रस्तावित पाइपलाइन ऐसे स्थान से डाली जा रही है, जहां सड़क किनारे टूटी-फूटी और कई स्थानों पर खाईनुमा नालियां मौजूद हैं। इन नालियों के कारण आए दिन लोग दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं तथा वाहन भी उनमें गिर चुके हैं। पार्षद का कहना है कि ऐसी स्थिति में नाली के समीप पेयजल पाइपलाइन बिछाने से सीवेज का दूषित पानी पाइपलाइन के माध्यम से घरों तक पहुंचने की आशंका है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि वार्डों में पहले से बिछी पेयजल लाइन काफी पुरानी हो चुकी है, जिससे लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसलिए नई पाइपलाइन डालना आवश्यक है, लेकिन उससे पहले आरसीसी कवर नाली का निर्माण कराया जाना चाहिए ताकि दोनों कार्य एक साथ व्यवस्थित रूप से पूरे हो सकें। उनका कहना है कि यदि पहले सड़क तोड़कर पाइपलाइन बिछाई गई तो नाली और अधिक चौड़ी हो जाएगी तथा लोगों की परेशानी बढ़ेगी, जबकि नाली निर्माण होने से सड़क भी चौड़ी होगी और जाम की समस्या से राहत मिलेगी।
पार्षद ने शिकायत में बताया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में निकाय निधि से वार्ड क्रमांक 15 में गणेश मदरेले से ननकू कुमरे तक तथा वार्ड क्रमांक 1 में बटनू पटेल से मुन्ना राठौर के खेत तक आरसीसी कवर नाली निर्माण का टेंडर जारी हुआ था। टेंडर के बाद ठेकेदार को कार्यादेश भी जारी किए गए, लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। शिकायत के अनुसार लगभग 48 लाख रुपये की लागत वाली इस नाली का जीएल कोड जारी होने के बावजूद निर्माण नहीं किया गया।
जनसुनवाई में पार्षद ने कलेक्टर से मांग की है कि स्वीकृत नाली निर्माण नहीं होने के कारणों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, यह स्पष्ट किया जाए कि स्वीकृत राशि से कोई अन्य कार्य तो नहीं कराया गया, नियम-38 के तहत यदि कोई प्रशासनिक या तकनीकी बाधा थी तो उसे सार्वजनिक किया जाए तथा यह भी बताया जाए कि टेंडर परिषद और पीआईसी द्वारा निरस्त किया गया था या नहीं। यदि दोबारा टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई है तो उसकी जानकारी भी दी जाए।
आवेदन में यह भी मांग की गई है कि सीवेज लाइन और पेयजल सप्लाई लाइन को एक साथ रखने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों का परीक्षण किया जाए। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में पूर्व स्वीकृत आरसीसी नाली की पूरी फाइल का परीक्षण कर मौके का निरीक्षण कराया जाए और उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाए। पार्षद ने नियमों के विपरीत कार्य करने वाले दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की भी मांग की है।




