असम के तिनसुकिया के हृषीकेश के स्मार्ट डस्टबिन ने किया तिनसुकिया का नाम रौशन।
बिना स्पर्श चलता सेंसर‑डस्टबिन, गीला‑सूखा कचरा स्वतः पृथक करने वाला यंत्र निर्माण।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम के तिनसुकिया जिले के बरदोलोई नगर के पाचवीं कक्षा के छात्र हृषीकेश फुकन ने एक सेंसर-आधारित स्मार्ट डस्टबिन बनाकर तिनसुकिया जिले का गौरव बढ़ाया है। चैंट स्टीफन हाईयर सेकेंडरी स्कूल के इस युवा आविष्कारक का डस्टबिन बिना हाथ लगाए काम करता है — जैसे ही कोई पास आता है, सेंसर से ढक्कन अपने आप खुल जाता है।
हृषीकेश के बनाए इस डिवाइस की खासियत यह है कि यह गीले और सूखे कचरे को स्वतः अलग कर देता है। डस्टबिन के अंदर लगे सेंसर और विभाजन तंत्र गीला कचरा अलग हिस्से में और सूखा कचरा दूसरे हिस्से में जमा कराते हैं। इससे कचरा प्रबंधन अधिक स्वच्छ, स्वास्थ्यवर्धक और पर्यावरण के अनुकूल बनता है तथा संक्रमण फैलने की संभावना भी घटती है क्योंकि ढक्कन छूने की आवश्यकता ही नहीं रहती। विद्यालय के शिक्षकों के अनुसार हृषीकेश में विज्ञान के प्रति गहरी रुचि और सृजनात्मक क्षमता है। उन्होंने बताया कि हृषीकेश ने अधिकतर सामग्री घर से उपलब्ध साधनों और शिक्षकों के मार्गदर्शन से जुटाकर यह परियोजना पूरी की। स्कूल प्रशासन ने उनके नवाचार की प्रशंसा की है और इसे प्रेरणादायी बताया है। हृषीकेश की माता का नाम डिंपी फुकन है; परिवारजन उनकी इस सफलता पर गर्व कर रहे हैं।इस नवाचार के आधार पर हृषीकेश ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार—2026 के विज्ञान और प्रौद्योगिकी (उद्भावन) वर्ग में आवेदन किया है। यदि उन्हें यह सम्मान मिलता है तो यह तिनसुकिया जिले के लिए एक महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण उपलब्धि मानी जाएगी। स्कूल के प्रधानाचार्य का कहना है कि हृषीकेश जैसे विद्यार्थी आने वाली पीढ़ियों को नई दिशा दिखाएंगे और अन्य छात्रों को विज्ञान में रुचि लेने के लिए प्रेरित करेंगे। स्थानीय लोग और शिक्षक उम्मीद जताते हैं कि ऐसे सस्ते और व्यावहारिक समाधान ग्रामीण व शहरी दोनों स्तरों पर कचरा प्रबंधन और स्वच्छता अभियानों को सुदृढ़ कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल स्तर पर ऐसे प्रोजेक्ट बच्चों में समस्या‑समाधान की सोच जगाते हैं, जो भविष्य में समाज के लिए लाभकारी होते हैं। पांचवीं कक्षा के इस छोटे वैज्ञानिक ने साबित कर दिया है कि उम्र मायने नहीं रखती। इच्छा, जिज्ञासा और सही मार्गदर्शन से बड़े परिणाम संभव होते हैं। विद्यालय और समुदाय हृषीकेश के उज्जवल भविष्य की कामना कर रहे हैं और आशा करते हैं कि उनका यह प्रोजेक्ट स्थानीय स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण में वास्तविक योगदान देगा।


