
नई दिल्ली। सूरत के आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के पिता की संपत्तियों की जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार को शिकायत दी है। इसके साथ ही, पार्टी के बिना रजिस्ट्रेशन चंदा लेने और कपिल सिब्बल के एक करोड़ रुपये के फंड पर 18% जीएसटी वसूलने को लेकर ईसीआई और सीबीआईसी का रुख किया है। क्या है पूरा मामला? कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार गुजरात के सूरत के आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने उनके परिवार की संपत्ति, पार्टी की फंडिंग और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर तीन अलग-अलग सरकारी एजेंसियों से शिकायत की है। तिवारी ने महाराष्ट्र सरकार, चुनाव आयोग और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड को पत्र भेजकर मामले की जांच कराने की मांग की है।
अमित तिवारी ने क्या-क्या आरोप लगाए? -अमित तिवारी का कहना है कि अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) में जूनियर इंजीनियर (जेई) के पद पर कार्यरत थे। उनका दावा है कि इस पद पर औसतन 60 से 65 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी आय में परिवार ने अपने बच्चों को अमेरिका जैसे महंगे देश में पढ़ाई के लिए कैसे भेजा। तिवारी ने महाराष्ट्र सरकार से मांग की है कि भगवानराव दीपके और उनके परिवार की आय और संपत्ति की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
अमित तिवारी ने चुनाव आयोग को भेजी शिकायत में आरोप लगाया है कि कॉकरोच जनता पार्टी खुद को राजनीतिक संगठन के रूप में पेश कर रही है और लोगों से चंदा भी जुटा रही है। उनका कहना है कि यदि कोई संगठन राजनीतिक दल की तरह काम करता है तो उसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29अ के तहत चुनाव आयोग में पंजीकरण कराना जरूरी होता है। तिवारी ने चुनाव आयोग से मांग की है कि यह जांच की जाए कि क्या सीजेपी बिना पंजीकरण के राजनीतिक गतिविधियां चला रही है और यदि ऐसा है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
कपिल सिब्बल के एक करोड़ रुपये पर भी उठाया सवाल-आरटीआई कार्यकर्ता ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) को भी शिकायत भेजी है। उन्होंने राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की ओर से सीजेपी को दिए जाने वाले 1 करोड़ रुपये के फंड का जिक्र करते हुए कहा है कि इस पूरे लेनदेन की जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि संबंधित कानून लागू होते हैं तो इस राशि पर 18 प्रतिशत जीएसटी वसूले जाने के पहलू की भी जांच की जाए।
नीट आंदोलन का भी किया जिक्र-अमित तिवारी ने अपनी शिकायत में सीजेपी के विरोध प्रदर्शनों का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि शुरूआत में आंदोलन नीट पेपर लीक के मुद्दे पर था और उसे व्यापक समर्थन मिला था। लेकिन बाद में आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनकी दिवंगत मां और अन्य नेताओं को लेकर कथित रूप से अभद्र टिप्पणियां की गईं, जो लोकतांत्रिक विरोध की मयार्दा के अनुरूप नहीं थीं।
अभिजीत दीपके के पिता की आय और संपत्ति की जांच की मांग-सीजेपी पर बिना पंजीकरण राजनीतिक गतिविधियां चलाने और चंदा जुटाने का आरोप।
कपिल सिब्बल के घोषित 1 करोड़ रुपये के फंड की जांच और कर संबंधी पहलुओं की पड़ताल की मांग।
महाराष्ट्र सरकार, चुनाव आयोग और सीबीआईसी को अलग-अलग शिकायतें भेजी गईं।



