हापुड़ में कांवड़ यात्रा को लेकर मदरसे को तिरपाल से ढका गया..
जलाभिषेक के बाद 12 अगस्त तक मदरसा के छात्रों के लिए अवकाश घोषित..

बड़ी लापरवाही आई सामने , वन वे रूट डाइवर्जन की बल्लियों को हटाकर कांवड़ मार्ग से गुजर रहे वाहन
कांवड़ मार्ग पर बनाई गई अस्थाई पुलिस चौकी और कांवड़ियों के लिए विश्राम स्थल
नेशनल प्रेस टाइम्स , ब्यूरो
हापुड़ (यूपी) – आज सावन के पहले सोमवार को हापुड़ में कांवड़ यात्रा को सकुशल संपन्न कराने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है । शिवभक्तों की आस्था और कांवड़ यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जिले से गुजरने वाले कांवड़ मार्ग पर सभी मदरसों और मस्जिदों को तिरपाल से ढक दिया गया है ।
बुलंदशहर की ओर जाने वाले इस कांवड़ मार्ग को धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता हैं। हापुड जनपद से कांवड़ मार्ग पर कुल 60 मंदिर , 69 मस्जिद, 150 शराब एवं बीयर की दुकानें तथा 237 मीट-मांस की दुकानें तथा एक बड़ा मदरसा स्थित हैं।कांवड़ मार्ग पर पढ़ने वाले इस बड़े मदरसे में हजारों छात्र विभिन्न राज्यों और शहरों से आकर पढ़ते हैं ।
इस संबंध में मदरसे के एक व्यक्ति ने जानकारी देते हुए बताया कि मदरसे के सभी छात्रों का अवकाश 12 अगस्त तक कर दिया गया है और सभी छात्रों को उनके घर भेज दिया गया है । इस समय मदरसे में कोई छात्र और शिक्षक नहीं है ।
हापुड पुलिस और प्रशासन ने जनपद में कांवड़ मार्ग पर 56 स्थानों को संवेदनशील श्रेणी में रखा है, जहां विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। इन स्थानों पर पुलिस, पीएसी, सिविल डिफेंस के जवानों और स्वयंसेवकों की तैनाती भी की गई है। इसके अलावा प्रमुख धार्मिक स्थलों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना की संभावना को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
हापुड के तहसील चौराहे से बुलंदशहर रोड पर जाने वाले कांवड़ मार्ग पर पुलिस द्वारा रूट डाइवर्जन के लिए वन वे करते हुए लकड़ी की बल्लियों का इस्तेमाल किया गया है लेकिन वहां पर किसी की तैनाती नहीं की गई है जिससे वाहन चालक बल्लियों को हटाकर कांवड़ मार्ग पर वाहन चला रहे हैं । इसी मार्ग पर कांवड़िया भी जा रहे हैं जिससे किसी हादसे का अंदेशा किया जा सकता है ।
जबकि वहीं दूसरी तरफ हाइवे NH 9 से बुलंदशहर को जाने वाले कांवड़ मार्ग पर अस्थाई पुलिस चौकी और कांवड़ियों के लिए विश्राम स्थल बनाए गए हैं । भारी वाहनों को डाइवर्जन करते हुए वन वे के रास्ते भेजा जा रहा है ।




