जालौन
क्षेत्र पंचायत महेवा के विकास कार्यों में खंड विकास अधिकारी एवं एनआरपी बाबू ने लगाया भ्रष्टाचार का तड़का
एक ही आरईडी बिल पर राज्य वित्त और 15वें वित्त की 50.38 लाख की धनराशि खर्च

क्षेत्र पंचायत महेवा में भुगतान व्यवस्था पर उठे सवाल, डीएम से की गहराई से जांच करने की मांग
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
उरई (जालौन)। खंड विकास अधिकारी एवं एनआर बाबू की मिली भगत से एक ही आरईडी बिल पर राज्य वित्त और 15वें वित्त की 50.38 लाख की धनराशि खर्च करने का एक बड़ा घोटाला प्रकाश में आया है जिसमें अलग-अलग काम होते हुए भी एक ही आरई डी बिल पर भुगतान निकाल लिया गया। क्षेत्र पंचायत महेवा में राज्य वित्त एवं 15वें वित्त आयोग की धनराशि से कराए गए विकास कार्यों के भुगतान को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने वित्तीय प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार अप्रैल, मई और जून 2026 के दौरान विभिन्न गांवों में कराए गए विकास कार्यों के लिए कुल 50,38,964 रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन इन सभी भुगतानों में आरईडी (ग्रामीण अभियंत्रण विभाग) का एक ही बिल लगाए जाने का उल्लेख है। दावा किया जा रहा है कि इसी एक बिल के आधार पर अलग-अलग कार्यों का भुगतान किया गया।इस संवाददाता को मिली जानकारी के अनुसार अप्रैल 2026 में 18,38,792 रुपये, मई 2026 में 28,74,244 रुपये और जून 2026 में 3,25,928 रुपये की धनराशि जारी की गई। यह राशि राज्य वित्त और 15वें वित्त आयोग की मद से व्यय की गई बताई गई है।
अप्रैल माह में चार कार्यों के लिए भुगतान दर्शाया गया है
पहला भुगतान कुटरा के मजरा गड़गुवा में अजय ठेकेदार के मकान के पास कूप मरम्मत एवं जीर्णाेद्धार कार्य के लिए किया गया। इस कार्य पर 4,37,857 रुपये खर्च दर्शाए गए हैं। इसका वाउचर संख्या एक्सवीएफसी/2026-27/पी/3 अंकित है। दूसरा भुगतान सरसई माई में राम नरेश कुशवाहा के दरवाजे के आगे नाला पार बड़ी पुलिया निर्माण के लिए किया गया। इस कार्य पर 6,83,929 रुपये खर्च दिखाए गए हैं। इसका वाउचर संख्या एक्सवीएफसी /2026-27/पी/4 दर्ज है। तीसरा भुगतान बाबाई में समी मोहम्मद के मकान से नवी के कोने तक आरआरसी नाला निर्माण हेतु शेष भुगतान के रूप में किया गया। इस पर 2,75,172 रुपये व्यय दर्शाए गए हैं। इसका वाउचर संख्या एक्सवीएफसी /2026-27/पी/5 है।चैथा भुगतान रायपुर में सुशील तिवारी के घर से भोलू पाल के घर की ओर नाला निर्माण कार्य के लिए किया गया। इस कार्य पर 4,42,334 रुपये खर्च दिखाए गए हैं। इसका वाउचर संख्या एक्सवीएफसी /2026-27/पी/6 है।
मई माह में सबसे अधिक धनराशि खर्च की गई
पहला भुगतान अटराकलां में सोनेलाल कोरी के घर से राघवराम लखाकर के दरवाजे तक इंटरलॉकिंग एवं नाली निर्माण कार्य के लिए किया गया। इस पर 5,99,295 रुपये व्यय दर्शाया गया है। इसका वाउचर संख्या 5टीएचएसएफसी/2026-27/पी/1 है।
दूसरा भुगतान चरसोनी में अरविंद विश्वकर्मा के मकान से बाबू कनौजिया के घर की ओर इंटरलॉकिंग एवं नाली निर्माण कार्य के लिए किया गया। इस कार्य पर 11,68,368 रुपये खर्च दिखाया गया है। इसका वाउचर संख्या 5 टीएसएसएससी/2026-27/पी/2 है।तीसरा भुगतान कोड़ा किररही में काल भैरव बाबा मंदिर पर 04 यूनिट शौचालय निर्माण के लिए किया गया। इस पर 3,52,953 रुपये व्यय दर्शाया गया है। इसका वाउचर संख्या एक्सवीएफसी/2026-27/पी/7 है। चैथा भुगतान बम्होरा में ज्वाला देवी मंदिर के पास मिनी शौचालय निर्माण के लिए किया गया। इस कार्य पर 4,00,675 रुपये खर्च दिखाया गया है। इसका वाउचर संख्या एक्सवीएफसी/2026-27/च/8 है।पांचवां भुगतान फिर से कोड़ा किररही में काल भैरव बाबा मंदिर पर 04 यूनिट शौचालय निर्माण के नाम पर किया गया। इस पर भी 3,52,953 रुपये खर्च दर्शाया गया है। इसका वाउचर संख्या एक्सएफसी/2026-27/पी/9 दर्ज है। एक ही स्थान और समान कार्य के लिए अलग-अलग वाउचर से भुगतान का उल्लेख होने के कारण भी चर्चा बनी हुई है।
जून माह भी स्कूलों की साइड वाल के निर्माण में घपला
जून माह में अटरा कला में डिग्री कॉलेज, राजकीय जूनियर हाई स्कूल और सचिवालय के दोनों तरफ इंटरलॉकिंग एवं साइडवाल निर्माण कार्य के लिए 3,25,928 रुपये का भुगतान दर्शाया गया है। इसका वाउचर संख्या एक्सवीएफसी/2026-27/पी/10 है।
एक ही बिल पर कई भुगतान ने बीडीओ एवं एनआरपी बाबू के भ्रष्टाचार का चिट्ठा खोल
अभिलेखों में उल्लेख है कि उपरोक्त सभी कार्यों के भुगतान में आरईडी विभाग का एक ही बिल लगाया गया है और उसी के आधार पर सभी भुगतान किए गए हैं। यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है, तो यह वित्तीय प्रक्रिया और लेखा नियमों के पालन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है। और खंड विकास अधिकारी महेवा अरुण कुमार सिंह एवं एनआरपी बाबू हेमंत मिश्रा की सांठ गांठ से अंजाम दिए गए बड़े भ्रष्टाचार को उजागर करता है। इस बड़े घोटाले की ओर विकास विभाग के बड़े अधिकारियों ने भी पूरी तरह से आंखें बंद कर ली जिससे ब्लॉक स्तर पर भ्रष्टाचार के कीर्तिमान स्थापित किए जाते रहे।
मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति की धज्जियां उड़ाई खंड विकास अधिकारी ने
भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस की नीति की धज्जियां उड़ाने में लगे खंड विकास अधिकारी महेवा एवं एनआरपी बाबू के द्वारा किए गए भ्रष्टाचार पर स्थानीय लोगों का कहना है कि जब अलग-अलग गांवों में अलग-अलग प्रकार के निर्माण कार्य कराए गए हैं, तो उनके लिए अलग-अलग मापन पुस्तिका, तकनीकी स्वीकृति, बिल और भुगतान अभिलेख होने चाहिए। ऐसे में एक ही बिल के आधार पर करोड़ों नहीं तो लाखों रुपये के भुगतान का मामला जांच का विषय बन सकता है।वित्तीय मामलों के जानकारों का कहना है कि राज्य वित्त और 15वें वित्त आयोग की धनराशि के उपयोग में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रत्येक भुगतान का स्वतंत्र अभिलेख होना आवश्यक है। यदि किसी स्तर पर प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जा सकती है। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी अरुण कुमार सिंह एवं एनआरपी बाबू से संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। क्षेत्र पंचायत महेवा में हुए इस बड़े भ्रष्टाचार की ओर जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट करते हुए मामले की गंभीरता से जांच करने के साथ ही दोषी लोगों खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।



