बागपत
कांवड़ यात्रा में आस्था के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी : डॉ. अभिनव धनकड़

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बड़ौत/बागपत : सावन के पावन महीने में भगवान शिव की भक्ति में लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। हरिद्वार एवं अन्य तीर्थस्थलों से पवित्र गंगाजल लेकर कांवड़िए लंबी दूरी पैदल तय करते हैं। यह यात्रा श्रद्धा, संकल्प, अनुशासन और सेवा की मिसाल है। हालांकि लगातार कई किलोमीटर पैदल चलने, गर्मी-उमस, बारिश, भीड़ और खान-पान में बदलाव के कारण कांवड़ियों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसे में आस्था के साथ अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।
मिथन नर्सिंग होम, छपरौली चुंगी, बड़ौत (बागपत) के हड्डी एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव धनकड़ (भारत), M.B.B.S., MS ने कांवड़ यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान अपने शरीर की क्षमता को समझें और किसी भी स्वास्थ्य समस्या को नजरअंदाज न करें।
पैरों, घुटनों और टखनों का रखें विशेष ध्यान
डॉ. अभिनव धनकड़ ने बताया कि लंबी दूरी तक लगातार पैदल चलने के कारण कांवड़ियों के पैरों, टखनों, घुटनों और कमर पर सबसे अधिक दबाव पड़ता है। इससे पैरों में दर्द, छाले, मांसपेशियों में खिंचाव, टखने में मोच और घुटनों में दर्द या सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान बीच-बीच में पर्याप्त आराम करना चाहिए। बहुत ज्यादा थकान होने पर केवल इस सोच के कारण लगातार चलते रहना कि यात्रा पूरी करनी है, स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
आरामदायक जूते और कपड़े पहनें
कांवड़ यात्रा के लिए आरामदायक जूते पहनना बेहद जरूरी है। ऐसे जूते पहनें जिनमें पैर सहज रहें और फिसलने की संभावना कम हो। बिल्कुल नए जूते पहनकर लंबी यात्रा शुरू करने से बचना चाहिए। पैरों में छाले या दर्द होने पर उन्हें नजरअंदाज न करें।
बारिश के मौसम में गीले मोजे और जूते अधिक समय तक पहनने से भी परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए पैरों को साफ और सूखा रखने का प्रयास करें।
दर्द को नजरअंदाज कर आगे न बढ़ें
डॉ. धनकड़ ने कहा कि यदि कांवड़िए के पैर, घुटने, टखने या कमर में लगातार अथवा तेज दर्द हो, सूजन आ जाए या चलने में परेशानी महसूस हो तो जबरदस्ती आगे बढ़ना उचित नहीं है। ऐसी स्थिति में कुछ समय आराम करें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सक से परामर्श लें।
उन्होंने कहा कि शरीर द्वारा दिए जा रहे संकेतों को समझना जरूरी है। दर्द को सहकर लगातार चलने से छोटी चोट गंभीर समस्या का रूप ले सकती है।
पानी और खान-पान का रखें विशेष ध्यान
लंबी पैदल यात्रा के दौरान शरीर में पानी की कमी और कमजोरी की समस्या हो सकती है। इसलिए नियमित अंतराल पर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। अत्यधिक पसीना आने, चक्कर, कमजोरी या बेचैनी महसूस होने पर तुरंत आराम करें।
यात्रा के दौरान स्वच्छ और हल्का भोजन करें। खुले में रखे कटे फल, दूषित पानी और संदिग्ध खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें। ज्यादा तला-भुना और भारी भोजन करने से भी यात्रा के दौरान परेशानी हो सकती है।
बारिश और फिसलन वाले रास्तों पर सावधानी
कांवड़ यात्रा के दौरान बारिश होने पर रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं। ऐसे में जल्दबाजी न करें और सावधानी से चलें। फिसलने से घुटने, टखने या हड्डियों में चोट लग सकती है।
बारिश में भीगने के बाद जल्द से जल्द कपड़े और मोजे बदलने तथा पैरों को सूखा रखने का प्रयास करें। मौसम अत्यधिक खराब होने पर सुरक्षित स्थान पर रुकना ही समझदारी है।
बुजुर्ग और जोड़ों की समस्या वाले श्रद्धालु विशेष सावधानी बरतें
डॉ. अभिनव धनकड़ ने कहा कि जिन श्रद्धालुओं को पहले से घुटनों, कमर, हड्डियों या जोड़ों से संबंधित परेशानी है, उन्हें लंबी यात्रा शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूर लेनी चाहिए। बुजुर्ग कांवड़ियों को भी अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही यात्रा करनी चाहिए।
पहले से किसी बीमारी की दवा चल रही है तो उसे नियमित रूप से लेते रहें और जरूरी दवाएं अपने साथ रखें।
छोटी चोट को भी गंभीरता से लें
कांवड़ यात्रा के दौरान गिरने, फिसलने या पैर मुड़ने जैसी स्थिति में दर्द को मामूली समझकर तुरंत चलना शुरू नहीं करना चाहिए। यदि चोट के बाद तेज दर्द, सूजन, पैर रखने में परेशानी या असामान्य स्थिति दिखाई दे तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
आस्था के साथ अनुशासन भी जरूरी
डॉ. धनकड़ ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था की यात्रा नहीं, बल्कि संयम, अनुशासन और सेवा की भी यात्रा है। कांवड़िए प्रशासन द्वारा निर्धारित मार्ग का पालन करें, यातायात नियमों का ध्यान रखें, भीड़ में धैर्य बनाए रखें और एक-दूसरे की मदद करें।
उन्होंने कांवड़ियों से अपील की कि “भक्ति में उत्साह जरूर रखें, लेकिन अपने शरीर की क्षमता का भी ध्यान रखें। स्वस्थ रहकर और सुरक्षित तरीके से यात्रा पूरी करना ही सबसे महत्वपूर्ण है।”
कांवड़ियों को दी शुभकामनाएं
अंत में डॉ. अभिनव धनकड़ ने सभी शिवभक्त कांवड़ियों को कांवड़ यात्रा की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान भोलेनाथ सभी श्रद्धालुओं की यात्रा सफल एवं मंगलमय करें। सभी कांवड़िए स्वस्थ और सुरक्षित अपने घर लौटें, यही उनकी कामना है।


