सीटों में 60% कटौती के विरोध में के०के०एम० कॉलेज में तालाबंदी, वर्षों से शिक्षकों व आधारभूत सुविधाओं की कमी पर भी उठे सवाल
Lockout at KKM College in protest against a 60% cut in seats; concerns also raised regarding the long-standing shortage of teachers and basic infrastructure.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़। के०के०एम० कॉलेज, पाकुड़ में स्नातक नामांकन के लिए निर्धारित सीटों में लगभग 60 प्रतिशत की कटौती किए जाने के विरोध में गुरुवार को छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने कॉलेज परिसर में प्रदर्शन करते हुए मुख्य भवन में तालाबंदी कर दी और धरने पर बैठ गये। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि सीटों में भारी कटौती के कारण हजारों योग्य छात्र-छात्राओं का उच्च शिक्षा में प्रवेश प्रभावित होगा। उनका कहना है कि पहले की तुलना में इस वर्ष सीटों की संख्या में लगभग 60 प्रतिशत की कमी कर दी गई है, जिससे नामांकन को लेकर छात्रों के बीच चिंता और असंतोष का माहौल है। धरने पर बैठे छात्रों ने कॉलेज प्रशासन एवं सम्बन्धित विश्वविद्यालय से सीटों में की गई कटौती को तत्काल वापस लेने तथा पूर्व की भांति पर्याप्त सीटें उपलब्ध कराने की मांग की। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आन्दोलन को और तेज किया जायेगा। इस आन्दोलन के दौरान छात्रों ने कॉलेज की वर्षों पुरानी समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि के०के०एम० कॉलेज में कई विषयों के लेक्चरर एवं प्रोफेसरों के पद लंबे समय से रिक्त हैं, जिससे नियमित पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। पाकुड़ जिले के एकमात्र डिग्री कॉलेज में शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों और स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षकों की नियुक्ति के साथ-साथ कॉलेज में अन्य आधारभूत सुविधाओं का भी अभाव है। उनका मानना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन एवं सम्बन्धित विभाग को कॉलेज में रिक्त पदों को भरने तथा आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में शीघ्र पहल करनी चाहिए, ताकि छात्र-छात्राओं का शैक्षणिक भविष्य बेहतर हो सके। इस बीच यह भी चर्चा में है कि तत्कालीन उपायुक्त मृत्युंजय कुमार वरनवाल ने कॉलेज प्राचार्य शिव प्रसाद लोहार द्वारा प्रस्तुत विभिन्न मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने का आश्वासन दिया था। हालांकि, स्थानीय लोगों के अनुसार लगभग ढाई वर्ष बीत जाने के बाद भी उन मांगों का पूर्ण समाधान नहीं हो सका है। यदि यह स्थिति बनी रहती है तो आधुनिक शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकताओं के अनुरूप छात्रों को सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर प्रशासन और सम्बन्धित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। समाचार लिखे जाने तक छात्रों का धरना जारी था। कॉलेज परिसर में प्रशासन की नजर बनी हुई थी तथा आंदोलन के कारण शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्य प्रभावित रहे।



