असम

असम के प्राग्ज्योतिषपुर विश्वविद्यालय में हुआ “दीक्षारम्भ 2026″। 

शिक्षामंत्री डॉ. रणोज पेगू ने किया नव निर्मित आवास भवनों का उद्घाटन। 

 नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 

असम के गुवाहाटी स्थित प्राग्ज्योतिषपुर विश्वविद्यालय के हाज़ंगबाड़ी, चंद्रपुर परिसर में सोमवार को 2026–27 शैक्षणिक वर्ष के दीक्षारम्भ समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के अवसर पर विश्वविद्यालय के नए उपाचार्य आवास “संदीपनि भवन” और शिक्षकों का आवास “पाणिनि भवन” का भी औपचारिक उद्घाटन किया गया।समारोह के मुख्य अतिथि असम सरकार के शिक्षामंत्री डॉ. रणोज पेगू रहे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के आचार्य लिफ्टेनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राणा प्रताप कलिता, उपाचार्य प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी, पंजीयक डॉ. देवब्रत खनिकर, डिमोरिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. तपन दास, विद्याभारती पूर्वोत्तर क्षेत्र के संपादक डॉ. जगदींद्र रायचौधुरी, संगठन सचिव डॉ. पवन तिवारी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक बशिष्ठ बुजरबरुवा उपस्थित रहे। समारोह बंदे मातरम्, असमसंगीत, दीपप्रज्ज्वलन और सरस्वती वन्दना के साथ शुरू हुआ। अपने संबोधन में शिक्षामंत्री डॉ. रणोज पेगू ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति और तीव्र तकनीकी परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य में विश्वविद्यालयों से पारंपरिक पाठ्यक्रमों की सीमाओं से आगे बढ़कर समाज व रोजगार क्षेत्र की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि “शिक्षा केवल ज्ञानार्जन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। प्रत्येक विभाग में नवाचारी, उद्यमोन्मुख और कौशल-आधारित पाठ्यक्रम लागू कर व्यवहारिक कौशल, डिजिटल दक्षता, आलोचनात्मक चिन्तन, संचार और उद्यमशीलता विकसित की जानी चाहिए।” उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और दर्शन के साथ आधुनिक शैक्षिक विषयों के सार्थक समन्वय पर भी जोर दिया। आचार्य राणा प्रताप कलिता ने छात्रों को जीवन की चुनौतियों का साहस और दृढ़ता से सामना करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने तकनीक के विवेकपूर्ण उपयोग पर बल देते हुए कहा कि “तकनीक का उपयोग शिक्षा, विकास और व्यक्तिगत उत्कृष्टता के साधन के रूप में करें।” उपाचार्य प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने विश्वविद्यालय को केवल शिक्षा का केंद्र न मानकर एक ‘गुरुतीर्थ’ के रूप में विकसित करने के अपने दृष्टिकोण की बात कही और भारतीय संस्कृति व आधुनिक ज्ञान के समन्वय से छात्रों में विवेक, तर्क और अनुसंधान भावना विकसित करने का आह्वान किया। समारोह में पंजीयक डॉ. देवब्रत खनिकर ने स्वागत भाषण रखा। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ और राष्ट्रगान से कार्यक्रम संपन्न किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा नए आवासों के माध्यम से एक सुदृढ़ शैक्षिक एवं प्रशासनिक वातावरण तैयार कर समेकित परिसर विकसित करने की उम्मीद जताई गई।

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