दिल्लीराजनीति

चिदंबरम के बाद केजरीवाल ने भी खुद को बताया ‘दिमागी नक्सली’

जो लोग विकसित भारत चाहते हैं...

नई दिल्ली : अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी के ‘दिमागी नक्सली’ शब्द को नई परिभाषा देते हुए खुद को देशभक्त बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से सवाल करने वाले, बेहतर सुविधाएँ चाहने वाले और विकसित भारत की आकांक्षा रखने वाले लोग दिमागी नक्सली हैं और उन्हें इस पहचान पर गर्व है। यह टिप्पणी राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ रही है, खासकर जब पूर्व गृह मंत्री चिदंबरम भी खुद को ‘दिमागी नक्सली’ कह चुके हैं।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि जो व्यक्ति भारतीय जनता पार्टी (इखढ) और केंद्र सरकार से सवाल करेगा और पूरे भारत में बेहतर सुविधाओं की मांग करेगा, उसे ‘दिमागी नक्सल’ कहा जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के बयान पर तंज कसते हुए यह बात कही। माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म (पहले ट्विटर) पर एक छोटे से वीडियो में, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर भगत सिंह और भीमराव रामजी अंबेडकर आज जीवित होते, तो प्रधानमंत्री उन्हें भी ‘दिमागी नक्सल’ कहते। उन्होंने खुद को भी ‘दिमागी नक्सल’ बताया और कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है क्योंकि वह एक सच्चे देशभक्त हैं।
केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के अनुसार, ‘दिमागी नक्सल’ वह व्यक्ति है जो सवाल उठाता है और शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाना चाहता है। उनके अनुसार, जो लोग अस्पताल और सड़कों जैसी अच्छी सुविधाएं चाहते हैं, वे ‘दिमागी नक्सल’ हैं। जो लोग उनसे और इखढ से नहीं डरते और ‘विकसित भारत’ चाहते हैं, वे ‘दिमागी नक्सल’ हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि हाँ। मैं दिमागी नक्सल हूँ। क्योंकि मैं देशभक्त हूँ। और मुझे इस पर गर्व है।
शनिवार को लाल किले की प्राचीर से 80वें स्वतंत्रता दिवस पर बोलते हुए, पीएम मोदी ने ‘दिमागी नक्सलियों’ की पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने का आह्वान किया – एक ऐसा शब्द जिसके बारे में उन्होंने ज्यादा विस्तार से नहीं बताया। उनकी इस टिप्पणी से विवाद खड़ा हो गया; कांग्रेस ने उन पर और बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के अनुसार, केंद्र का विरोध करने वाला कोई भी व्यक्ति ‘दिमागी नक्सली’ है।
जब बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी था, तब पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सली’ होने पर गर्व है। उनकी इस टिप्पणी की आलोचना बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने की, जिन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 2006 के उस बयान का जिÞक्र किया जिसमें उन्होंने नक्सलवाद को भारत के लिए आंतरिक सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौती बताया था। बीजेपी के राज्यसभा सदस्य ने दिन में एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर ‘दिमागी नक्सली’ का एक बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। हमें हैरानी है कि इसके 24 घंटे के भीतर ही कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा है कि उन्हें ‘दिमागी नक्सली’ होने पर गर्व है… मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूँ – कौन सही था, डॉ. मनमोहन सिंह या पी. चिदंबरम?

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