बालाघाट
संक्रमण के साये में बैगा बस्तियों तक पहुंची सेवा की संवेदना
रामेश्वर कटरे ने जगाई जागरूकता की अलख

कुकड़ा, कोरका, मातला और धर्मशाला में ग्रामीणों से सीधा संवाद, प्रसूता महिलाओं को मच्छरदानी छाते, साबुन व डियोड्रेंट, बच्चों को कपड़े और चरण पादुका वितरित
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) : दक्षिण बैहर के वनांचल क्षेत्रों में अज्ञात संक्रमण की स्थिति ने जहां ग्रामीणों के बीच चिंता का वातावरण बनाया है, वहीं जिले के अन्य बैगा बाहुल्य क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य, स्वच्छता और सावधानी को लेकर जागरूकता की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी उद्देश्य को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता रामेश्वर कटरे लगातार वनांचल गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से सीधे संवाद कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने मछुरदा पंचायत के अंतर्गत आने वाले बैगा बाहुल्य कोरका, मातला और धर्मशाला गांवों का भ्रमण कर ग्रामीणों का हाल जाना और उन्हें स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक किया।
दक्षिण बैहर का यह क्षेत्र लंबे समय से भौगोलिक कठिनाइयों, सीमित संसाधनों और दुर्गम आवागमन के कारण प्रशासन तथा बाहरी दुनिया से अपेक्षाकृत दूर रहा है। कभी अति नक्सल प्रभावित रहे इन वनांचल क्षेत्रों में आज भी बड़ी संख्या में बैगा परिवार प्राकृतिक और पारंपरिक जीवन पद्धति के बीच जीवन यापन करते हैं। ऐसे क्षेत्रों में किसी भी स्वास्थ्य संकट के समय जागरूकता का संदेश समय पर पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। इसी भावना के साथ रामेश्वर कटरे ने इन बस्तियों तक पहुंचकर ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें सावधानी बरतने की समझाइश दी।
बस्तियों में पहुंचकर जाना ग्रामीणों का हाल
अभियान के दौरान रामेश्वर कटरे ने ग्रामीणों से केवल औपचारिक मुलाकात नहीं की, बल्कि परिवारों के बीच बैठकर उनकी दैनिक जीवन की परिस्थितियों, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और बच्चों की जरूरतों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने ग्रामीणों से पूछा कि उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने में किसी तरह की परेशानी तो नहीं आ रही है और बीमारी अथवा स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर वे किस प्रकार उपचार प्राप्त कर रहे हैं।
उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि स्वास्थ्य संबंधी किसी भी परेशानी को सामान्य मानकर टालना ठीक नहीं है। समय पर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना और स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जा रही सेवाओं का लाभ लेना बेहद जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं, छोटे बच्चों और बुजुर्गों की सेहत को लेकर अधिक सतर्क रहने की सलाह दी।
प्रसूता महिलाओं और दूधमुंहे बच्चों का रखा विशेष ध्यान
अभियान के दौरान प्रसूता महिलाओं और दूधमुंहे बच्चों की जरूरतों को विशेष प्राथमिकता दी गई। प्रसूता महिलाओं के लिए मच्छरदानियां वितरित की गईं, ताकि छोटे बच्चों और माताओं को मच्छरों से बचाव मिल सके। इसके साथ ही व्यक्तिगत स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महिलाओं को साबुन की टिकिया और डियोड्रेंट उपलब्ध कराए गए।
रामेश्वर कटरे ने महिलाओं से चर्चा करते हुए कहा कि घर में स्वच्छता की शुरुआत महिलाओं से होती है। यदि परिवार की महिलाएं स्वास्थ्य और साफ-सफाई को लेकर जागरूक रहेंगी तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ेगा। बच्चों के आसपास साफ-सफाई रखना, पीने के पानी की स्वच्छता का ध्यान रखना और व्यक्तिगत स्वच्छता को दिनचर्या का हिस्सा बनाना आवश्यक है।
उन्होंने महिलाओं को यह भी समझाया कि स्वास्थ्य को लेकर किसी भी प्रकार की परेशानी या असामान्य लक्षण दिखाई देने पर घरेलू स्तर पर ही उसे दबाने या नजरअंदाज करने के बजाय स्वास्थ्य कर्मियों से संपर्क करना चाहिए।
0 से 12 वर्ष के बच्चों में बांटे कपड़े और चरण पादुका
बस्तियों में रहने वाले जरूरतमंद बच्चों की जरूरतों को देखते हुए 0 से 12 वर्ष तक के बच्चों को कपड़े और चरण पादुका वितरित की गईं। वनांचल क्षेत्रों में बारिश और कठिन रास्तों के बीच बच्चों के लिए पैरों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। सामग्री प्राप्त करने के बाद बच्चों के चेहरों पर खुशी नजर आई।
कटरे ने कहा कि बच्चों के लिए कपड़े या चरण पादुका उपलब्ध कराना केवल सहायता का कार्य नहीं है, बल्कि उनके प्रति समाज की जिम्मेदारी और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इन बच्चों में भी आगे बढ़ने की पूरी क्षमता है। जरूरत केवल उन्हें अवसर, मार्गदर्शन और सहयोग देने की है।
‘हमारे जिले के लोग हैं, उनकी जिम्मेदारी भी हमारी’
ग्रामीणों से संवाद के दौरान रामेश्वर कटरे ने कहा कि दक्षिण बैहर के वनांचल में रहने वाले बैगा परिवारों को किसी समस्या के समय अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र हमारा अपना है और यहां रहने वाले लोग भी हमारे ही समाज का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा, “यह हमारा क्षेत्र है, हमारा अपना जिला है और यहां के निवासी भी हमारे अपने हैं। ऐसे समय में हमें पक्ष-विपक्ष, दलगत और क्षेत्रगत भावनाओं से ऊपर उठकर मानवीय दृष्टिकोण से काम करने की आवश्यकता है।”
उन्होंने कहा कि किसी भी संकट के समय राजनीति करने के बजाय लोगों की जिंदगी और सुरक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। प्रशासन, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और आम नागरिक यदि मिलकर काम करें तो किसी भी कठिन परिस्थिति से निपटने में मदद मिल सकती है।
मैदानी स्वास्थ्य कर्मियों का बढ़ाया मनोबल
रामेश्वर कटरे ने उन स्वास्थ्य कर्मियों और प्रशासनिक मैदानी अमले के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया, जो लगातार वनांचल क्षेत्रों में जाकर ग्रामीणों की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के कर्मचारी सुबह से घर से निकलकर दूरस्थ बस्तियों तक पहुंचते हैं और दिनभर लोगों की सेवा करने के बाद देर शाम वापस लौटते हैं।
उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों के मन में भी संवेदनाएं हैं और वे भी चाहते हैं कि समस्या जल्द समाप्त हो। ऐसे समय में समाज को उनका मनोबल बढ़ाना चाहिए। यदि जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मी और प्रशासनिक कर्मचारी उत्साह एवं सहयोग के साथ कार्य करेंगे तो प्रभावित क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और प्रभावी हो सकती है।
‘हर व्यक्ति बने एक कड़ी’
रामेश्वर कटरे ने कहा कि बैगा परिवारों तक स्वास्थ्य और जागरूकता का संदेश पहुंचाने के लिए हर व्यक्ति को एक कड़ी बनना होगा। उन्होंने कहा कि किसी गांव में एक व्यक्ति जागरूक होता है तो वह अपने परिवार को जागरूक कर सकता है और एक परिवार आगे कई परिवारों को सावधानी के लिए प्रेरित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि समाज की ताकत सामूहिक प्रयास में है। शासन अपनी योजनाओं और संसाधनों के माध्यम से काम कर रहा है, लेकिन योजनाओं की जानकारी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और जरूरतमंदों को उसका लाभ दिलाने में समाज की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
शिक्षा को लेकर भी ग्रामीणों को किया जागरूक
स्वास्थ्य और स्वच्छता के साथ रामेश्वर कटरे ने ग्रामीणों के बीच शिक्षा के महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने महिलाओं और अभिभावकों से कहा कि बच्चों को केवल पारंपरिक जीवन पद्धति तक सीमित रखने के बजाय उन्हें शिक्षा से जोड़ना जरूरी है। शिक्षा बच्चों को अपने अधिकारों, स्वास्थ्य, रोजगार और शासन की योजनाओं को समझने में सक्षम बनाती है।
उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि आदिवासी विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के लिए शासन की ओर से शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न अवसर और प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जाते हैं। यदि बच्चे नियमित रूप से पढ़ेंगे तो वे भविष्य में उच्च शिक्षा प्राप्त कर शासकीय सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों का भविष्य बदलना है तो आज से ही शिक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। माता-पिता बच्चों को स्कूल भेजें और उनकी पढ़ाई को लेकर निरंतर रुचि लें।
परंपरा के साथ स्वच्छता और जागरूकता भी जरूरी
रामेश्वर कटरे ने ग्रामीणों से कहा कि बैगा समाज की अपनी समृद्ध परंपरा और जीवन पद्धति है, जिसे संरक्षित रखना जरूरी है। लेकिन बदलते समय के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता को भी जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा, “हम अपनी परंपरागत जीवन पद्धति के साथ आगे बढ़ सकते हैं, लेकिन उसके साथ स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता को भी अपनाना होगा। यही आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित और मजबूत बनाएगा।”
उन्होंने ग्रामीणों से घर के आसपास साफ-सफाई रखने, बच्चों की स्वच्छता का ध्यान रखने, साफ पानी का उपयोग करने तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर तत्काल स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं का लाभ लेने की अपील की।
महिलाओं के साथ बैठकर सुनी समस्याएं
अभियान के दौरान महिलाओं के साथ अलग से बैठकर वर्तमान परिस्थितियों पर चर्चा की गई। महिलाओं ने परिवार और बच्चों से जुड़ी अपनी दैनिक समस्याएं भी साझा कीं। कटरे ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक स्तर पर प्रयास करने का भरोसा दिलाया।
उन्होंने कहा कि किसी भी अभियान की सफलता तभी संभव है, जब स्थानीय लोगों की बात सुनी जाए। वनांचल में रहने वाले लोगों की वास्तविक परिस्थितियों को समझे बिना केवल बाहर से योजनाएं बनाने से अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं किए जा सकते।
बच्चों की मुस्कान बनी अभियान की पहचान
जब बच्चों को कपड़े और चरण पादुका वितरित किए गए तो उनके चेहरे पर खुशी देखने को मिली। कई बच्चों ने उत्साह के साथ सामग्री प्राप्त की। इस दौरान कटरे ने बच्चों से बातचीत कर उनकी पढ़ाई और स्कूल जाने के बारे में भी जानकारी ली।
उन्होंने बच्चों को नियमित स्कूल जाने और मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज की छोटी-सी मदद यदि किसी बच्चे में पढ़ने और आगे बढ़ने का विश्वास पैदा करती है तो यही सेवा की सबसे बड़ी सार्थकता है।
वर्षों से वनांचल में संपर्क का सिलसिला
सामाजिक कार्यकर्ता रामेश्वर कटरे पिछले कई वर्षों से दक्षिण बैहर और आसपास के वनांचल क्षेत्रों में लगातार ग्रामीणों के बीच पहुंचकर संवाद करते रहे हैं। जरूरतमंद बच्चों को कपड़े, चरण पादुका, जूते-चप्पल, छाते और अन्य उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराने के साथ वे ग्रामीणों की समस्याओं को समझने और उन्हें शासन की योजनाओं तथा स्वास्थ्य-शिक्षा के प्रति जागरूक करने का प्रयास करते रहे हैं।
वर्तमान संक्रमण की स्थिति को देखते हुए उनके द्वारा इस जनजागृति अभियान को अधिक व्यापक रूप दिया जा रहा है। उनका प्रयास है कि वनांचल की उन बस्तियों तक भी जागरूकता का संदेश पहुंचे, जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आमतौर पर बाहरी लोगों की पहुंच सीमित रहती है।
सेवा के पीछे राजनीतिक नहीं, मानवीय उद्देश्य
कटरे ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का उद्देश्य किसी प्रकार का राजनीतिक प्रचार नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों के बीच पहुंचकर उनकी मदद करना और उन्हें जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में समाज को एक-दूसरे के साथ खड़ा होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि एक परिवार दूसरे परिवार की चिंता करे, एक गांव दूसरे गांव के लोगों की मदद करे और समाज का सक्षम वर्ग दूरस्थ बस्तियों तक पहुंचे तो समस्याओं का सामना करना आसान हो सकता है।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन द्वारा दिए जा रहे निर्देशों का पालन करें, किसी भी स्वास्थ्य समस्या को छिपाएं नहीं तथा अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें।
‘संकट में साथ खड़ा होना ही सच्ची सामाजिक जिम्मेदारी’
रामेश्वर कटरे ने कहा कि किसी भी आपदा या स्वास्थ्य संकट के समय केवल सहायता सामग्री बांट देना पर्याप्त नहीं है। जरूरतमंदों के बीच पहुंचना, उनकी बात सुनना, उन्हें भरोसा देना और सही जानकारी उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि “सेवा केवल वस्तु देने का नाम नहीं है। सेवा तब सार्थक होती है, जब सामने वाले व्यक्ति को यह महसूस हो कि संकट की घड़ी में वह अकेला नहीं है और समाज उसके साथ खड़ा है।”
उन्होंने कहा कि बैगा परिवारों की सुरक्षा, बच्चों की शिक्षा, महिलाओं का स्वास्थ्य और परिवारों में स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ाना लगातार जारी रहेगा। उनका प्रयास है कि वनांचल की बस्तियों में रहने वाला प्रत्येक परिवार स्वास्थ्य के प्रति सजग हो, प्रत्येक बच्चा शिक्षा से जुड़े और जरूरतमंद परिवारों तक सहयोग का हाथ पहुंचे।
इस दौरान ग्रामीणों ने भी वनांचल तक पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनने और बच्चों एवं महिलाओं को उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराने के लिए रामेश्वर कटरे के प्रति आभार व्यक्त किया।




