मेरठ

एमआईईटी में बायो-एआई पर अंतरराष्ट्रीय मंथन

151 शोध पत्रों में दिखी नई तकनीक की झलक

 एकेटीयू कुलपति प्रो. जेपी पांडे बोले- बायोटेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और पर्यावरण संरक्षण में एआई की भूमिका को अहम बताया
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

मेरठ। बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम शोध एवं तकनीकी नवाचारों को साझा करने के उद्देश्य से मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एमआईईटी) के जैव प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। “बायो-एआई इनोवेशन फॉर सस्टेनेबल बायोटेक्नोलॉजी एंड एनवायरनमेंट” विषय पर आयोजित सम्मेलन में देश-विदेश से 151 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि एकेटीयू के कुलपति प्रो. जेपी पांडे, विशिष्ट अतिथि प्रो. सुभाष सी. चौहान, प्रोफेसर एवं प्रमुख, कैंसर इम्यूनोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी डिवीजन, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास रियो ग्रांडे वैली, अमेरिका, अकादमिक पार्टनर डॉ. सत्य प्रकाश वर्मा, आयोजन सचिव डॉ. गौरव शर्मा और एमआईईटी के चेयरमैन विष्णु शरण ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान शोध पत्रिका का विमोचन भी किया गया।
सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से प्राप्त 151 शोध पत्रों को शामिल किया गया। पहले दिन 52 शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण एवं विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा हुई। शेष शोध पत्रों पर आगामी सत्रों में विचार-विमर्श किया जाएगा।
मुख्य अतिथि प्रो. जेपी पांडे ने बायोटेक्नोलॉजी के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समन्वय पर आधारित सम्मेलन की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय में एआई बायोटेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला रहा है। एआई आधारित तकनीकों से जटिल शोध प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और तेज बनाया जा सकता है। इसके साथ ही सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में भी एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
तकनीकी सत्र में आईजीआईबी, दिल्ली के वैज्ञानिक-एफ डॉ. राजेश पांडे ने उन्नत मल्टी-ओमिक्स तकनीकों के माध्यम से सूक्ष्मजीवों की प्रोफाइलिंग में हो रही प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आधुनिक मल्टी-ओमिक्स तकनीकें सूक्ष्मजीवों के जटिल जैविक स्वरूप और उनके कार्यों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
वहीं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के डीएसआईआर के वैज्ञानिक-जी डॉ. अनूप सिंह ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान अनुदान और विद्यार्थियों में नवाचार को बढ़ावा देने वाली विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को उपलब्ध अवसरों और योजनाओं के माध्यम से अनुसंधान एवं नवाचार को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की।
सम्मेलन के पहले दिन विभिन्न प्रतिष्ठित शिक्षाविदों एवं वैज्ञानिकों ने सत्र अध्यक्ष और विषय विशेषज्ञ वक्ता के रूप में सहभागिता की। इनमें प्रो. जितेंद्र सिंह, विभागाध्यक्ष, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय; डॉ. अशिमा कथूरिया, प्रोफेसर, एमआईईटी; डॉ. कार्तिक शर्मा; प्रो. सुभाष चौहान, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास रियो ग्रांडे वैली, अमेरिका; डॉ. राजेश पांडेय, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक, सीएसआईआर; डॉ. अनूप सिंह, वैज्ञानिक-ई, डीएसआईआर, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय; प्रो. शैलेंद्र शर्मा, सीसीएसयू; डॉ. नेहा वर्मा, एमआईईटी; डॉ. शिप्रा चौधरी, एमआईईटी; प्रो. काव्य दशोरा, आईआईटी दिल्ली; प्रो. अनिल गुप्ता, संस्थापक, हनी बी नेटवर्क तथा प्रो. मोहम्मद ज़फ़र, ओमान यूनिवर्सिटी शामिल रहे।
विशेषज्ञों ने अपने-अपने क्षेत्रों में हो रहे नवीनतम शोध, तकनीकी नवाचारों और समकालीन चुनौतियों पर विचार साझा किए। उनके व्याख्यानों से शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों को नई शोध संभावनाओं, तकनीकी दृष्टिकोण और नवाचार के अवसरों से परिचित होने का अवसर मिला।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों एवं शोध को एक साझा मंच प्रदान करना रहा। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि एआई और बायोटेक्नोलॉजी का समन्वय स्वास्थ्य, पर्यावरण, माइक्रोबियल रिसर्च और सतत विकास से जुड़ी चुनौतियों के समाधान में नई संभावनाएं पैदा कर सकता है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में विभागाध्यक्ष डॉ. अविनाश सिंह, डॉ. अशिमा कथूरिया, नितिका वत्स, डॉ. नेहा सिंह सहित विभाग की पूरी टीम का विशेष योगदान रहा।

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