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तेज बुखार के साथ टूट रहा है शरीर तो तुरंत जाएं डॉक्टर के पास

दिल्ली वालों के लिए मुसीबत बनी ये बीमारी

नई दिल्ली । देश के कई राज्यों में एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू के साथ वायरल बुखार और सांस संबंधी संक्रमण बढ़ रहे हैं। दिल्ली में अगस्त की शुरूआत तक 1,344 मामले सामने आए, जबकि मुंबई में भी पिछले साल के मुकाबले केस बढ़े हैं। इसमें अचानक बुखार, सूखी खांसी, शरीर में दर्द, गले में खराश जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
राजधानी दिल्ली-एनसीआर इन दिनों स्वाइन फ्लू की खतरनाक चपेट में है। तेज बुखार, सिर-शरीर में दर्द और सांस की दिक्कतों के साथ बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। बढ़ते जोखिमों को देखते डॉक्टर सभी लोगों को इन दिनों श्वसन संक्रमण से बचाव के लिए निरंतर उपाय करते रहने की सलाह दे रहे हैं। लोगों से सार्वजनिक स्थानों पर मास्क लगाने, हाथों की स्वच्छता बनाए रखने की अपील की जा रही है।
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने हालात का जायजा लेने के लिए गुरुवार को दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के स्वास्थ्य विभाग और अस्पतालों के साथ बैठक की। विभाग को निगरानी बढ़ाने, तैयारियों को मजबूत करने और जरूरी स्वास्थ्य प्रोटोकॉल लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने भी शुक्रवार को दिल्ली में स्वाइन फ्लू की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की और जरूरी निर्देश दिए।
अस्पतालों से प्राप्त हो रही जानकारियों के मुताबिक मरीज बहुत तेज बुखार की शिकायत कर रहे हैं, कई लोगों का कहना है कि इससे पहले उन्होंने इतना तेज बुखार कभी नहीं झेला था।
स्वास्थ्य मंत्री ने की बैठक-केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने शुक्रवार को देश में एच1एन1 इन्फ्लूएंजा की मौजूदा स्थिति और तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी पर खास ध्यान देते हुए लगातार सतर्कता और त्वरित निगरानी की जरूरतों पर जोर दिया। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह भी इस बैठक में शामिल हुए। नड्डा ने इन्फ्लूएंजा के ट्रेंड पर कड़ी नजर रखने और मामलों का जल्द पता लगाने व समय पर इलाज सुनिश्चित करने के लिए पहले से तैयारी करने की जरूरत पर जोर दिया।
दिल्ली में स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारियों की भी समीक्षा की गई, जिसमें अस्पताल के बेड, क्रिटिकल केयर सुविधाएं और मौसमी इन्फ्लूएंजा व गंभीर श्वसन बीमारी वाले मरीजों के इलाज के लिए जरूरी अन्य चीजों की उपलब्धता शामिल थी।
स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों में जागरूकता और बचाव के स्वस्थ तरीकों, जैसे श्वसन और हाथ की स्वच्छता का पालन करने के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों को लगातार या गंभीर श्वसन संबंधी लक्षण, सांस लेने में तकलीफ या अन्य चेतावनी वाले संकेत महसूस हों, उन्हें तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
दिल्ली में स्वाइन फ्लू के हालात-स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दिल्ली में मौसम बदल रहा है, नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव से ऐसे हालात बन रहे हैं जिनसे सांस का संक्रमण तेजी से फैल सकता है। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने जानकारी दी थी कि पिछले साल की तुलना में इस साल दिल्ली में स्वाइन फ्लू के मामलों में पहले से छह गुना से अधिक की बढ़ोतरी है। ऐसे में हालात का और बिगड़ना समस्याओं को बढ़ाने वाला हो सकता है।
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से अस्थमा, डायबिटीज जैसी दिल या फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
बच्चों के मामले में भी खास सावधानी जरूरी है। बेंगलुरु के डॉक्टरों ने बच्चों में फ्लू जैसे लक्षण और सांस संबंधी संक्रमण बढ़ने की बात कही है। गंभीर या लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षणों वाले बच्चों में ऌ1ठ1 की जांच की जा रही है।
स्वाइन फ्लू को लेकर डॉक्टर की सलाह-दिल्ली में अगस्त की शुरूआत तक एच1एन1 के 1,344 मामले दर्ज किए गए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 229 थी। मुंबई में भी इस साल 1 जून से 15 अगस्त के बीच 309 मामले मिले, जबकि पिछले साल इसी दौरान 72 मामले दर्ज हुए थे। यानी आंकड़े बताते हैं कि इस बार फ्लू जैसे संक्रमण पर नजर रखना जरूरी है।
अमर उजाला से बातचीत में इंटेंसिव केयर के डॉ शेखर विक्रम सिंह बताते हैं, स्वाइन फ्लू को लेकर लोगों में काफी चिंता देखी जा रही है। लेकिन हर संक्रमित व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कई स्वस्थ लोग सामान्य देखभाल और उपचार से ठीक हो जाते हैं।
हालांकि चिंता तब बढ़ती है जब बुखार और खांसी के साथ सांस फूलने लगे, आॅक्सीजन कम हो जाए, सीने में दर्द हो या हालत लगातार बिगड़ती जाए।
एच1एन1 के लक्षण शुरूआत में सामान्य फ्लू जैसे लग सकते हैं। यही कारण है कि अक्सर लोगों में समय पर इसका निदान नहीं हो पाता है।
बहुत तेज बुखार और सांस की समस्या-स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्वाइन फ्लू कई मामलों में गंभीरता वाला हो सकता है। आमतौर पर ये हल्के श्वसन तंत्र के हल्के संक्रमण का कारण बनता है, लेकिन गंभीर स्थितियों में इसके कारण निमोनिया, सांस लेने में दिक्कत और मौत तक हो सकती है।
वैसे तो ज्यादातर स्वस्थ लोगों को हल्की बीमारी होती है और वे सही देखभाल से पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, लेकिन ज्यादा जोखिम वाले और कमजोर इम्युनिटी वालों में ये दिक्कत ज्यादा हो सकती है।
गंभीर स्थितियों में अचानक 102-104 बुखार, ठंड लगने, सूखी खांसी, गले में खराश के साथ नाक बहने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
कुछ मरीजो को पेट से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं जिसमें जी मिचलाने, उल्टी-दस्त की दिक्कत होती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, प्रभावित क्षेत्रों में इन दिनों अगर तेज बुखार के साथ सांस की दिक्कत हो रही है या निमोनिया जैसे लक्षण हो रहे हैं उन्हें तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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