अंतरराष्ट्रीयदिल्ली

स्विस राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद बोले पीएम नरेंद्र मोदी 

वैश्विक शांति और संस्थाओं में सुधार जरूरी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता कर वैश्विक शांति और संस्थागत सुधारों पर जोर दिया। व्यापार समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख रोजगार का लक्ष्य रखा गया। साथ ही रक्षा, व्यापार और युवाओं के लिए मोबिलिटी साझेदारी मजबूत करने पर भी सहमति बनी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन, बातचीत और कूटनीति के प्रति प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश वैश्विक शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए अपना सहयोग जारी रखेंगे। सोमवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन के साथ बातचीत के बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देश बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थाओं में सुधार को महत्वपूर्ण मानते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड दोनों ही लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन, बातचीत और कूटनीति में विश्वास रखते हैं। हम वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे। चाहे यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, भारत ने शांति की दिशा में हर सार्थक प्रयास का लगातार समर्थन किया है। हम इस बात पर भी सहमत हैं कि बढ़ती वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थाओं में सुधार आवश्यक है।
स्विस गणमान्य व्यक्ति का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा मुझे स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए बहुत खुशी हो रही है। मैं भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना करता हूं। पिछले साल अक्टूबर में, उनके व्यक्तिगत सहयोग से, हमने EFTA देशों के साथ ऐतिहासिक व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह किसी यूरोपीय आर्थिक समूह के साथ भारत का पहला FTA है। यह निवेश, नवाचार, रोजगार और आपसी समृद्धि का एक महत्वाकांक्षी खाका भी है। इसके साथ, हम अगले 15 वर्षों में भारत में 100 बिलियन डॉलर का निवेश हासिल करेंगे और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करेंगे।” द्विपक्षीय संबंधों के सदियों पुराने होने पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने 19वीं सदी में स्विस आल्प्स और हिमालय के बीच समानताएं देखी थीं, जबकि महात्मा गांधी ने भी इस देश में समय बिताया था, जिससे समकालीन संबंधों में ये ऐतिहासिक यादें जीवित हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “आज, नवाचार, बुनियादी ढांचा और उन्नत तकनीक हमारी दोस्ती के मजबूत स्तंभ बनकर उभरे हैं। आज के शिखर सम्मेलन के साथ, हम अपनी साझेदारी को नई गति और ऊंचाई देने जा रहे हैं।” प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि उन्होंने और राष्ट्रपति पार्मेलिन ने सैन्य आदान-प्रदान, रक्षा विनिर्माण और सहयोग के लिए नए रास्ते तलाशे हैं, साथ ही परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में संयुक्त प्रयासों का विस्तार करने पर भी सहमति बनी है।
उन्होंने कहा कि हमने स्विट्जरलैंड में भारत के निर्यात के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ाने और दोनों देशों के बीच निवेश को और आसान बनाने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। इससे स्विट्जरलैंड को भारत के कृषि, फार्मा, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा। साथ ही, हम भारत के अहम क्षेत्रों जैसे बायोटेक, लाइफ साइंसेज, बैंकिंग, इंश्योरेंस, फूड प्रोसेसिंग और सस्टेनेबिलिटी में नया स्विस निवेश आकर्षित करेंगे। आपसी रिश्तों को द्विपक्षीय संबंधों की मुख्य ताकत बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा आज साइन किए गए माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट और यंग प्रोफेशनल्स एग्रीमेंट से स्विट्जरलैंड में भारतीय छात्रों, शोधकतार्ओं, प्रोफेशनल्स और युवाओं के लिए कई नए मौके खुलेंगे।

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