
नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो
बरेली। एक दशक पहले मऊ-आजमगढ़ में आतंक का पर्याय बना D-9 गैंग का सरगना सुजीत सिंह उर्फ बुढ़वा पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। आज उसी घटना की बरसी है।
मऊ के चिरैयाकोट थाना क्षेत्र के अल्देमऊ गांव निवासी सुजीत के खिलाफ आजमगढ़-मऊ में 40 से अधिक गंभीर मुकदमे दर्ज थे। व्यापारियों-डॉक्टरों से रंगदारी वसूलना उसकी कार्यशैली थी। 2015 में सपा नेता विनय चौबे उर्फ झंडा और रवि मौर्य हत्याकांड के बाद वह मुख्य निशाने पर आया था।
11 अगस्त 2017 को मऊ से रामपुर जेल शिफ्टिंग के दौरान शौच का बहाना बनाकर वह पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया था। फरारी के बाद उसने गैंग को फिर सक्रिय किया। उस पर पहले 15 हजार, फिर 50 हजार का इनाम घोषित किया गया।
तत्कालीन एसपी आजमगढ़ अजय साहनी (वर्तमान में डीआईजी बरेली परिक्षेत्र) ने इस चुनौती को स्वीकार किया।
कैसे हुआ एनकाउंटर:
18 अगस्त 2017 को शहर कोतवाल योगेंद्र बहादुर सिंह की टीम शारदा चौक पर चेकिंग कर रही थी। बाइक सवार दो संदिग्धों को रोकने पर उन्होंने फायरिंग कर दी, जिसमें सिपाही आनंद घायल हुए। पीछा करने पर बदमाश सठियांव होते हुए गजहड़ा की खाली कांशीराम आवास कॉलोनी में घुस गए। एसओ मुबारकपुर अनूप शुक्ला की टीम की घेराबंदी में हुई जवाबी कार्रवाई में सुजीत मारा गया, उसका साथी फरार हो गया। मुठभेड़ में एसओ और स्वाट सिपाही अवधेश सिंह भी घायल हुए थे।
यह एनकाउंटर तत्कालीन डीजीपी के दौरे से एक दिन पहले हुआ था। इस साहसिक कार्य के लिए बाद में अजय साहनी को वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।



