ग्राम सभा में विवाद के बाद मारपीट के आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
कोयलारी में सामुदायिक भवन के स्थल चयन को लेकर विवाद; दो ग्रामीणों ने पुलिस कार्रवाई पर भी उठाए सवाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट/तिरोड़ी। ग्राम पंचायत कोयलारी में 5 अक्टूबर को आयोजित सामान्य ग्राम सभा के दौरान विवाद और मारपीट के आरोप सामने आए हैं। ग्राम निवासी लक्ष्मीकांत गोपाले और हीरालाल गोपाले ने वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, ग्राम सभा में राज्य वित्त आयोग से स्वीकृत करीब 25 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित सामुदायिक भवन के स्थल चयन को लेकर चर्चा होनी थी। बैठक शुरू होने से पहले ही कुछ ग्रामीणों के बीच विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसी दौरान जागेश डहरवाल ने लक्ष्मीकांत गोपाले के साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट की। बीच-बचाव करने पहुंचे हीरालाल गोपाले और अन्य ग्रामीणों के साथ भी अन्य लोगों द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विवाद के दौरान उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। उनका कहना है कि घटना का वीडियो कुछ ग्रामीणों द्वारा बनाया गया है, जिसे पुलिस के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। शिकायत के बाद लक्ष्मीकांत का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटंगी में चिकित्सीय परीक्षण कराए जाने की बात भी कही गई है।
थाना प्रभारी पर लगाए पक्षपातपूर्ण कार्यवाही के आरोप
शिकायत में तिरोड़ी थाना प्रभारी विजय राजपूत पर भी पक्षपातपूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि चिकित्सीय परीक्षण के बाद थाना लौटने पर उनके मोबाइल फोन जब्त किए गए तथा उनके विरुद्ध एससी/एसटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज करने की धमकी दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें रात करीब 10 बजे तक थाने में बैठाकर रखा गया और परिजनों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई।
शिकायतकर्ताओं ने इन आरोपों की वरिष्ठ अधिकारी से जांच कराने की मांग की है। साथ ही घटना से संबंधित वीडियो फुटेज को सुरक्षित कर जांच में शामिल करने तथा जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की लागू धाराओं के तहत कार्रवाई का अनुरोध किया है। थाना प्रभारी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की विभागीय जांच की मांग भी शिकायत में की गई है।
उल्लेखनीय है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का पक्ष अथवा जांच में सामने आने वाले तथ्य ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेंगे।




