लोनी की सड़कों पर ‘विकास’ के हिचकोले, बरसात आते ही गड्ढों में फिर फूटने लगे पानी के फुव्वारे
लंदन बनाने का दावा, सड़कें दिखा रहीं मंगल ग्रह का नजारा; जनता पूछ रही डामर रोड आया कहां और गया कहां?

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : कभी लोनी को लंदन बनाने का सपना दिखाया गया था। चुनावी मंचों से विकास के ऐसे-ऐसे दावे किए गए कि जनता को लगा था कि जल्द ही सड़कों पर गाड़ियां नहीं, शायद विकास दौड़ेगा। लेकिन हकीकत में हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। शहर की कई प्रमुख सड़कों पर गड्ढे इतने गहरे और बेतरतीब नजर आ रहे हैं कि वाहन चालक सफर नहीं, मानो रोजाना ‘ऑफ-रोड एडवेंचर’ पर निकल रहे हों।
दिल्ली-सहारनपुर मार्ग सहित क्षेत्र की बदहाल सड़कों पर जगह-जगह बने गड्ढे और जलभराव राहगीरों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अपने समर्थकों की बीच बात करते करते यही सड़कें नेताओं के भाषणों में ‘गड्ढा मुक्त’ हो जाती हैं, लेकिन बारिश का समय आते ही वही गड्ढे फिर अपनी पूरी शान से वापस लौट आते हैं।
वादों की सड़क और गड्ढों का स्वागत द्वार
व्यंग्य करते हुए स्थानीय लोग कहते हैं कि सड़क किनारे एक बोर्ड लगा देना चाहिए ‘नेताजी के विकास का स्पेशल स्विमिंग पूल, कृपया सावधानी से प्रवेश करें।’
लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण और विकास कार्यों के उद्घाटन-शिलान्यास के समय लोनी क्षेत्र में नारियल तो बहुत फूटते है, फीते कटते हैं, तस्वीरें खिंचती हैं और सोशल मीडिया पर विकास की चमकदार तस्वीरें दिखाई जाती हैं। मगर कुछ समय बाद सड़क से डामर और वादों से विकास दोनों ही फाइलों में दफन होकर रह जाते हैं।
नेताओं के भाषणों में सड़कें इतनी चिकनी होती हैं कि लगता है लोनी में गड्ढे नाम की कोई चीज ही नहीं है। जमीन पर पहुंचते ही वही विकास धूल, कीचड़ और गड्ढों में तब्दील दिखाई देता है। जनता सवाल करती है तो जवाब मिलता है‘विकास की बुनियाद तैयार हो रही है, थोड़ा इंतजार कीजिए।’ अब लोग पूछ रहे हैं कि आखिर विकास की यह बुनियाद कब पूरी होगी और तब तक उनकी कमर कितनी बार टूटेगी?
सड़क से ज्यादा मजबूत निकले शिलान्यास के पत्थर
लोनी की सड़कों को लेकर एक और दिलचस्प चर्चा लोगों के बीच है। उनका कहना है कि सड़क बने या न बने, लेकिन शिलान्यास और उद्घाटन के पत्थर क्षेत्र में जरूर मजबूती से खड़े दिखाई देते हैं।
स्थानीय नागरिक संजय अग्रवाल ने तंज कसते हुए कहा कि रात के अंधेरे में सड़क के गड्ढे भले ही दिखाई न दें, लेकिन विकास का पत्थर जरूर नजर आ जाता है कभी-कभी बाइक से टकराने के बाद।
लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण की घोषणा के साथ ही उम्मीदें भी जगती हैं, लेकिन काम की रफ्तार देखकर लगता है कि डामर से पहले बरसात का मौसम आ जाता है।
चुनाव नजदीक, फिर सजने लगी वादों की दुकान
जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव का मौसम करीब आता है, वैसे-वैसे पुराने वादों पर नई पैकिंग चढ़ने लगी है। जनता को उम्मीद है कि इस बार फिर ‘गड्ढा मुक्त सड़क’, ‘बेहतर विकास’ और ‘लोनी को बदलने’ जैसे नारे सुनाई देंगे।
लेकिन इस बार जनता शायद सिर्फ भाषण सुनने के बजाय सड़क पर काम भी देखना चाहती है। सवाल सीधा है—अगर लोनी को लंदन बनाना था तो जनता को मंगल ग्रह जैसी सड़कें क्यों मिलीं?
फिलहाल हालात यह हैं कि नेता विकास के दावे करते नजर आते हैं और जनता उन्हीं दावों के बीच बने गड्ढों से बचती हुई अपनी मंजिल तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। चुनावी वादों की चमक बरकरार है, बस सड़कों का डामर उसका साथ छोड़ चुका है।



