गाजियाबाद

लोनी में प्रदूषण के ‘कारखानों’ पर प्रशासन का शिकंजा

25 अवैध इकाइयां सील

सालों से जहरीला धुआं उगल रही फैक्ट्रियों पर कार्रवाई, बिजली कनेक्शन भी काटे; शिकायतों के बाद जागा प्रदूषण विभाग
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : दिल्ली से सटे लोनी क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाली अवैध औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ मंगलवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। प्रशासन, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), विद्युत निगम, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों ने अलग-अलग इलाकों में छापेमारी कर धातु गलाने वाली 25 अवैध इकाइयों को सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान इन इकाइयों के बिजली कनेक्शन भी काटे गए। अचानक हुई कार्रवाई से फैक्ट्री संचालकों में हड़कंप मच गया और कई संचालक इकाइयां बंद कर मौके से फरार हो गए।
 जिलाधिकारी के निर्देश पर कार्रवाई के लिए सात संयुक्त टीमें गठित की गई थीं। जिनमें एसडीएम लोनी दीपक सिंघनवाल के नेतृत्व में टीमों ने बैहटा हाजीपुर, सेवाधाम, अमित विहार, प्रेमनगर, कृष्णा नगर, अंकित विहार और टीला शहबाजपुर समेत विभिन्न क्षेत्रों में एक साथ दबिश दी।
जांच के दौरान बड़ी संख्या में ऐसी इकाइयां मिलीं, जहां कथित तौर पर नियमों की अनदेखी करते हुए धातु गलाने का काम किया जा रहा था। टीमों ने मौके पर ही 25 इकाइयों को सील कर दिया और उनके विद्युत कनेक्शन भी विच्छेदित कराए।
550 फैक्ट्रियां बंद कराने के बाद भी क्यों नहीं थम रहा जहरीला धुआं?
लोनी में अवैध फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्रवाई कोई पहली बार नहीं हुई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष अब तक करीब 550 फैक्ट्रियों को बंद कराया जा चुका है। इसके बावजूद क्षेत्र में अवैध औद्योगिक गतिविधियों के लगातार सामने आने से कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायतें तो यहां तक पहुंचीं कि कार्रवाई के बाद कुछ बंद इकाइयों के बिजली कनेक्शन दोबारा जोड़ दिए गए। इन शिकायतों के आधार पर यूपीपीसीबी की ओर से विद्युत निगम को पत्र भेजे जाने की बात सामने आई है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी इकाई को प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग सील कर चुका है, तो वह दोबारा कैसे संचालित हो जाती है? आखिर सील टूटने और कनेक्शन दोबारा जुड़ने की जिम्मेदारी किसकी है?
प्रदूषण की मार झेल रही जनता, कार्रवाई का इंतजार कब तक?
लोनी में लंबे समय से प्रदूषण को लेकर शिकायतें उठती रही हैं। धातु गलाने, रंगाई और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों से निकलने वाले धुएं और अपशिष्ट को लेकर स्थानीय नागरिकों की चिंताएं लगातार सामने आती रही हैं। प्रदूषण का असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने की आशंका भी जताई जाती रही है।
क्षेत्र में जब प्रदूषण का स्तर गंभीर स्थिति तक पहुंचता है, तब विभागीय अमला सक्रिय दिखाई देता है। लेकिन कार्रवाई के बाद फिर वही इकाइयां संचालित होने की शिकायतें सामने आएं तो सवाल केवल फैक्ट्री संचालकों पर नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था पर भी उठना स्वाभाविक है।
‘सील’ के बाद कनेक्शन जुड़ा तो कौन होगा जिम्मेदार?
एसडीएम लोनी दीपक सिंघनवाल ने बताया कि 25 फैक्ट्रियों को सील किया गया है और निर्देश दिए गए हैं कि इनके विद्युत कनेक्शन दोबारा न जोड़े जाएं। यदि ऐसा किया जाता है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अब देखने वाली बात यह होगी कि मंगलवार की कार्रवाई के बाद इन फैक्ट्रियों पर सील कितने समय तक कायम रहती है और क्या वास्तव में इनके विद्युत कनेक्शन दोबारा नहीं जुड़ते।
क्योंकि लोनी की जनता का सवाल सीधा है—जब 550 से अधिक इकाइयां बंद कराई जा चुकी हैं, तो फिर प्रदूषणकारी फैक्ट्रियां बार-बार कैसे लौट आती हैं?
सांठगांठ के आरोपों की भी हो जांच
स्थानीय स्तर पर समय-समय पर यह आरोप लगते रहे हैं कि कुछ अवैध औद्योगिक इकाइयों को विभागीय संरक्षण प्राप्त है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि सील की गई इकाइयों के कनेक्शन दोबारा जुड़ने की शिकायतें सही पाई जाती हैं तो पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करते हुए निष्पक्ष जांच की जरूरत है।
लोनी को जहरीले धुएं से निजात दिलाने के लिए केवल फैक्ट्रियों पर सील लगाना पर्याप्त नहीं होगा। सील के बाद निगरानी, दोबारा संचालन रोकना और नियम तोड़ने वालों के साथ-साथ संरक्षण देने वालों पर कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है।
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