
गौ सेवा के नाम पर बदइंतजामी का आलम, मामला सामने आते ही आनन-फानन में कराया गया अंतिम संस्कार
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : एक तरफ जनपद स्तर पर गौवंश संरक्षण को लेकर बड़ी-बड़ी बैठकें कर सरकारी गौशालाओं में तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने के बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लोनी विकास खंड की ग्राम पंचायत मीरपुर हिंदू स्थित गौ आश्रय स्थल में सामने आई तस्वीरें इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही हैं। यहां कथित लापरवाही के चलते मृत पड़े गोवंश के शवों को कुत्ते नोचकर खाते रहे। मामला अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद आनन-फानन में कुत्तों द्वारा नोचे गए मृत गोवंश का अंतिम संस्कार कराया गया।
जानकारी के अनुसार मीरपुर हिंदू गांव स्थित गौ आश्रय स्थल में मृत पड़ी गाय और बछड़ों के शवों की समय रहते देखभाल और अंतिम संस्कार नहीं कराया गया। इसके चलते कुत्ते शवों को नोचते रहे। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल मच गई। खंड विकास अधिकारी विनी यादव को घटना की जानकारी मिली तो उन्होंने गौशाला का संचालन कर रहे ज्ञान श्री फाउंडेशन ट्रस्ट के लोगों को इस लापरवाही के लिए फटकार लगाई और शीघ्र इस मामले में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
घटना की जानकारी पशुपालन विभाग सहित अन्य जनपद स्तरीय अधिकारियों तक पहुंचने के बाद विभागीय स्तर पर भी हड़कंप मच गया। हालांकि आरोप यह भी है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए कुछ जिम्मेदार अधिकारी इसे दबाने में जुट गए। ऐसे में सवाल यह है कि यदि गौशाला में गोवंशों की देखरेख व्यवस्था इतनी लचर थी तो संबंधित विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं हुई?
बैठक में बडे बडे दावे, गौशालाओं में बदहाली
गौर करने वाली बात यह है कि कल ही में जनपद में गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश कुमार शुक्ल और सदस्य दीपक गोयल की अध्यक्षता में गौवंश संरक्षण समिति की बैठक आयोजित हुई थी। बैठक में गौ आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने और निराश्रित गोवंश को बेहतर संरक्षण उपलब्ध कराने को लेकर अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए थे।
बैठक में व्यवस्थाओं को लेकर किए जा रहे दावों के बीच मीरपुर हिंदू की गौशाला की स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर सरकारी व्यवस्था और निगरानी के दावों के बावजूद गौशाला में मृत गोवंश के शव को कुत्ते अपना निवाला कैसे बनते रहे?
जिम्मेदार कौन ट्रस्ट, केयरटेकर या पशुपालन विभाग?
इस पूरे मामले ने गौशाला के संचालन और निगरानी व्यवस्था पर कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि ट्रस्ट और केयरटेकर की जिम्मेदारी गोवंशों की देखभाल तथा मृत गोवंश का तत्काल अंतिम संस्कार कराने की थी तो इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई, जानकारी मिलने दोषी लोगों पर क्या कार्रवाई की गई?
वहीं यदि पशुपालन विभाग और प्रशासन के अधिकारी नियमित रूप से गौ आश्रय स्थल का निरीक्षण करते हैं तो उन्हें वहां की बदहाल व्यवस्था नजर क्यों नहीं आई? क्या निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित रह गया है?
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि मृत गोवंश का समय रहते अंतिम संस्कार क्यों नहीं कराया गया? क्या संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी या फिर जानकारी होने के बावजूद लापरवाही बरती गई?
मामले की जांच और कार्रवाई की मांग
मीरपुर हिंदू गौ आश्रय स्थल की घटना ने गौ संरक्षण व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में केवल फटकार और आनन-फानन में अंतिम संस्कार तक सीमित रहता है या फिर ट्रस्ट, केयरटेकर और निगरानी के लिए जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी करता है।
गौवंश संरक्षण के नाम पर होने वाली बैठकों और जमीनी स्तर पर गौशालाओं की वास्तविक स्थिति के बीच कितना अंतर है, मीरपुर हिंदू की यह घटना उसका गंभीर उदाहरण बनकर सामने आई है



