गाजियाबाद
रेड फ्लेम प्रेस कांफ्रेंस में शामिल लोगों को ‘जिहादी’व आतंकवादी कहने पर भड़के मनोज धामा
मनोज धामा बोले भाईचारा बचाने जुटे लोगों को गाली देना गलत, वायरल वीडियो ने बढ़ाई हलचल; पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : रेड फ्लेम रेस्टोरेंट में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रेस कांफ्रेंस में शामिल विभिन्न धर्मों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों को कथित तौर पर ‘जिहादी’ और ‘आतंकवादी’ कहे जाने तथा अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इस पूरे प्रकरण से जुड़े कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा कथित रूप से गाली-गलौज और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए देखा-सुना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि रेड फ्लेम रेस्टोरेंट में हुई प्रेस कांफ्रेंस में विभिन्न धर्मों और संगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए थे। आयोजकों और प्रतिभागियों का कहना है कि बैठक का उद्देश्य लोनी क्षेत्र में आपसी भाईचारा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना था, न कि किसी समुदाय विशेष के खिलाफ माहौल बनाना। ऐसे में प्रेस कांफ्रेंस में शामिल लोगों के लिए कथित रूप से ‘जिहादी’ या ‘आतंकवादी’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
‘ऐसी भाषा पूरी तरह गलत’ पूर्व चेयरमैन मनोज धामा
अंकुर विहार क्षेत्र के वार्ड संख्या 33 के सभासद रामनिवास त्रिपाठी के कार्यालय के उद्घाटन समारोह में पहुंचे पूर्व चेयरमैन मनोज धामा ने भी पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रेस कांफ्रेंस में शामिल लोगों को इस तरह के शब्दों से संबोधित करना और उनके साथ गाली-गलौज करना पूरी तरह गलत है।
मनोज धामा ने कहा कि यदि वह उस समय प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद होते और उनके सामने इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जाता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। उन्होंने कहा कि वह किसी की गाली बर्दाश्त नहीं करते और ऐसी स्थिति में विवाद का परिणाम अलग हो सकता था। उन्होंने यहां तक कहा कि ऐसी स्थिति पैदा होने पर पुलिस को भी काफी मशक्कत करनी पड़ती और बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच सकते थे।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई पुलिस की मुश्किलें
वहीं, इस मामले से जुड़े बताए जा रहे कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में पुलिस बल की मौजूदगी और मौके पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ दिखाई दे रही है। कुछ वीडियो में स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा कथित रूप से एक-दूसरे के खिलाफ आपत्तिजनक और अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आ रही है।
वीडियो सामने आने के बाद लोनी क्षेत्र में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर लोगों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई और मौके पर मौजूद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के अलावा कथित अमर्यादित व्यवहार पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की?
पुलिस की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल,
पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल पुलिस की भूमिका को लेकर खड़ा हो रहा है। यदि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम की पुष्टि होती है तो सवाल यह है कि पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद कथित गाली-गलौज और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कैसे होता रहा? क्या पुलिस को मौके पर ही कानून के अनुसार कार्रवाई नहीं करनी चाहिए थी?
लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि पुलिस ने किन परिस्थितियों में तत्काल कार्रवाई करने के बजाय पूरे घटनाक्रम को शांत कराने तक सीमित रहकर चुप्पी साधना ही उचित समझा। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और उसमें मौजूद सभी व्यक्तियों की पहचान तथा घटनाक्रम का पूरा संदर्भ स्पष्ट होना अभी जांच के अधीन है
फिलहाल रेड फ्लेम प्रकरण में कौन पक्ष सही था और किसकी गलती थी, इसका निष्पक्ष निर्धारण जांच के बाद ही संभव होगा। लेकिन इतना जरूर है कि सार्वजनिक मंच पर कथित तौर पर धार्मिक या आतंकी शब्दों का इस्तेमाल और गाली-गलौज जैसे आरोपों ने लोनी के सामाजिक माहौल को लेकर नई बहस जरुर छेड़ दी है। अब निगाहें पुलिस और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी व घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या मामला महज सोशल मीडिया की चर्चाओं तक सीमित रह जाता है।यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा


